नई दिल्ली: न्यायिक सेवा की तैयारी कर रहे कानून स्नातकों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने Civil Judge (Junior Division) के पद पर सीधी भर्ती के लिए पहले लागू 3 साल की वकालत की अनिवार्य शर्त को बदलते हुए अब 1 साल की वास्तविक प्रैक्टिस को पर्याप्त माना है। कोर्ट ने साथ ही चयन के बाद उम्मीदवारों के लिए ट्रेनिंग और लॉ क्लर्कशिप की व्यवस्था भी तय की है।
यह फैसला Bhumika Trust v. Union of India & Ors. मामले में 21 अगस्त 2026 को सुनाया गया। सुप्रीम कोर्ट की पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन शामिल थे। फैसला 2:1 के बहुमत से आया, जिसमें जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने असहमति जताई।
क्या बदला है?
सुप्रीम कोर्ट ने मई 2025 में Civil Judge (Junior Division) की सीधी भर्ती के लिए परीक्षा में बैठने से पहले 3 साल की वकालत की प्रैक्टिस अनिवार्य की थी। इस फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी। अब कोर्ट ने 3 साल की शर्त को बरकरार नहीं रखा है। 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद जारी होने वाली भर्ती अधिसूचनाओं के लिए उम्मीदवार को परीक्षा में बैठने से पहले कम से कम 1 साल की वास्तविक वकालत की प्रैक्टिस पूरी करनी होगी।
खास बातें
* 3 साल की अनिवार्य प्रैक्टिस घटाकर 1 साल की गई।
* यह नियम Civil Judge (Junior Division) की सीधी भर्ती पर लागू होगा।
* 1 अप्रैल 2027 से जारी होने वाली भर्ती अधिसूचनाओं में कम से कम 1 साल की वास्तविक प्रैक्टिस जरूरी होगी।
* प्रैक्टिस को Certificate of Practice के जरिए सत्यापित किया जाएगा।
* सिर्फ कागज पर प्रैक्टिस दिखाना पर्याप्त नहीं होगा; कोर्ट ने वास्तविक न्यायिक कार्यवाही में उम्मीदवार की मौजूदगी और भागीदारी के रिकॉर्ड पर जोर दिया है।
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31 मार्च 2027 तक उम्मीदवारों को बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने उन कानून स्नातकों के लिए ट्रांजिशन व्यवस्था भी बनाई है, जो 20 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच जारी होने वाली Civil Judge (Junior Division) भर्ती अधिसूचनाओं के तहत आवेदन करेंगे। इस अवधि में उम्मीदवारों को 3 साल की प्रैक्टिस की शर्त पूरी करने की जरूरत नहीं होगी। कोर्ट ने कहा है कि ऐसे कानून स्नातक परीक्षा के लिए आवेदन कर सकेंगे और उन्हें आवेदन के उद्देश्य से 1 साल की सक्रिय प्रैक्टिस पूरी मान लिया जाएगा। इसके लिए उस deemed period का अलग Certificate of Practice नहीं देना होगा।
लेकिन जज बनते ही सीधे कोर्ट नहीं संभालेंगे
यह फैसला सिर्फ प्रैक्टिस की अवधि कम करने तक सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने चयनित उम्मीदवारों के लिए 2 साल की ट्रेनिंग व्यवस्था भी तय की है। चयन होने के बाद उम्मीदवारों को शुरुआत में Trainee Judicial Officer के रूप में नियुक्त किया जाएगा।
इसके बाद उन्हें:
1 साल की Judicial Academy Training + 1 साल की Structured Law Clerkship करनी होगी। Structured Law Clerkship की अवधि भी एक साल होगी।
इसमें:
* 6 महीने Principal District Judge, District & Sessions Judge या Higher Judicial Service के किसी सदस्य के अधीन काम करना होगा।
* इसके बाद 6 महीने संबंधित High Court के किसी मौजूदा जज के अधीन क्लर्कशिप करनी होगी।
* क्लर्कशिप पूरी होने के बाद संबंधित High Court के जज की ओर से उम्मीदवार की प्रगति और उपयुक्तता की रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
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ट्रेनिंग और क्लर्कशिप का फायदा क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि जज बनने वाले उम्मीदवारों को अदालत की वास्तविक कार्यप्रणाली और कानूनी प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव होना जरूरी है। इसी वजह से पहले की तरह लंबी अवधि की वकालत को अनिवार्य रखने के बजाय कोर्ट ने 1 साल की प्रैक्टिस + 2 साल की ट्रेनिंग/क्लर्कशिप का मॉडल तैयार किया है। यानी उम्मीदवार को ज्यूडिशियरी में आने से पहले कुछ व्यावहारिक अनुभव मिलेगा और चयन के बाद भी उसे सीधे स्वतंत्र रूप से न्यायिक कार्य नहीं करना होगा।
मई 2025 में क्या नियम था?
20 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने Civil Judge (Junior Division) की सीधी भर्ती के लिए 3 साल की प्रैक्टिस अनिवार्य कर दी थी। इससे ऐसे कानून स्नातकों के सामने मुश्किल खड़ी हो गई थी, जो पहले से मौजूद नियमों के आधार पर न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने नए फैसले में माना कि अचानक 3 साल की शर्त लागू होने से ऐसे युवा कानून स्नातकों को परेशानी हुई, इसलिए एक ट्रांजिशन व्यवस्था जरूरी थी।
नया सिस्टम कब से लागू होगा?
31 मार्च 2027 तक: भर्ती अधिसूचनाओं के लिए ट्रांजिशन व्यवस्था लागू रहेगी। 3 साल की प्रैक्टिस की शर्त से छूट रहेगी।
1 अप्रैल 2027 से: Civil Judge (Junior Division) परीक्षा में बैठने के लिए उम्मीदवार को कम से कम 1 साल की वास्तविक वकालत की प्रैक्टिस करनी होगी।
क्या 1 साल में जज बन जाएंगे?
नहीं। यह बात समझना बहुत जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं कहा कि LLB के बाद सिर्फ 1 साल में कोई व्यक्ति सीधे जज बन जाएगा। 1 साल की प्रैक्टिस परीक्षा में बैठने की पात्रता के लिए है।
परीक्षा और चयन के बाद उम्मीदवार को:
1 साल Judicial Academy Training + 1 साल Structured Law Clerkship से गुजरना होगा। उसके बाद मूल्यांकन संतोषजनक होने पर नियमित पद पर नियुक्ति होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों किया बदलाव?
कोर्ट ने माना कि न्यायिक सेवा में आने वाले उम्मीदवारों को कानून की किताबों के साथ-साथ अदालत की वास्तविक कार्यप्रणाली का अनुभव भी होना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का एकमात्र रास्ता 3 साल की पारंपरिक वकालत नहीं होना चाहिए। इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए 3 साल की पूर्व प्रैक्टिस की जगह 1 साल की वास्तविक प्रैक्टिस और चयन के बाद 2 साल की ट्रेनिंग/क्लर्कशिप का मॉडल बनाया गया है।
कितने साल तक रहेगा यह नया सिस्टम?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह व्यवस्था फैसले की तारीख से 5 साल तक लागू रहेगी। इसके बाद भर्ती की गुणवत्ता, ट्रेनिंग और क्लर्कशिप की प्रभावशीलता और चयनित अधिकारियों के प्रदर्शन जैसे पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। जरूरत पड़ने पर व्यवस्था में दोबारा बदलाव किया जा सकता है। (Live Law)