आजकल सोशल मीडिया पर 'लिंफैटिक वॉकिंग' का ट्रेंड काफी तेजी से वायरल हो रहा है। फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स का ऐसा दावा है कि रोजाना सिर्फ 10 मिनट की यह खास वॉक शरीर की सूजन और पेट की ब्लोटिंग को मिनटों में गायब कर सकती है। लेकिन क्या यह वाकई कोई चमत्कारी तकनीक है या फिर सिर्फ एक और सोशल मीडिया ट्रेंड? आइए इसके पीछे के विज्ञान को आसान भाषा में समझते हैं।

क्या है लिंफैटिक सिस्टम (Lymphatic System)?

हमारे शरीर में सर्कुलेटरी सिस्टम (रक्त संचार) की तरह ही एक 'लिंफैटिक सिस्टम' भी होता है। इसमें 'लिंफ' (Lymph) नाम का एक रंगहीन तरल बहता है, जो शरीर से अतिरिक्त फ्लूइड, टॉक्सिन्स और वेस्ट मटीरियल को बाहर निकालने का काम करता है।

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खून को पंप करने के लिए हमारे पास दिल होता है, लेकिन लिंफैटिक सिस्टम के पास ऐसा कोई नेचुरल पंप नहीं होता। यह सिस्टम पूरी तरह से हमारी मांसपेशियों की हलचल और सांस लेने की प्रक्रिया पर निर्भर करता है। जब हम घंटों एक ही जगह बैठे रहते हैं, तो यह फ्लूइड पैरों या टिश्यूज में जमा होने लगता है, जिससे सूजन और भारीपन महसूस होता है।

सामान्य वॉक से कैसे अलग है लिंफैटिक वॉकिंग?

सामान्य वॉकिंग की तुलना में लिंफैटिक वॉकिंग में तीन मुख्य बातों पर ध्यान दिया जाता है:

सीधा पॉश्चर (Straight Posture): रीढ़ की हड्डी को एकदम सीधा रखकर चलना।

गहरी सांसें (Deep Breathing): कदम मिलाने के साथ-साथ गहरी और लयबद्ध सांसें लेना।

हाथों का मूवमेंट: हाथों को थोड़ा ज्यादा और स्वाभाविक तरीके से झुलाना।

दावा किया जाता है कि यह कॉम्बिनेशन मांसपेशियों के संकुचन को बढ़ाता है, जिससे लिंफ फ्लूइड तेजी से आगे बढ़ता है।

क्या 10 मिनट की वॉक वाकई असरदार है?

लेकिन एक सीमा तक जब आप चलना शुरू करते हैं,तो पैरों की मांसपेशियां सिकुड़ती और फैलती हैं। इससे लिंफ वाहिकाओं (vessels) पर दबाव पड़ता है और रुका हुआ फ्लूइड पूरे शरीर में वापस सर्कुलेट होने लगता है। रिसर्च के मुताबिक, हल्की एक्सरसाइज के दौरान लिंफ का बहाव आराम की स्थिति के मुकाबले कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए, यदि आप लंबे समय तक डेस्क जॉब करते हैं और 10 मिनट का ब्रेक लेकर टहलते हैं, तो आपको सूजन और भारीपन से तुरंत राहत मिलेगी।

क्या यह फैट लॉस या परमानेंट वेट लॉस है?

एक्सपर्ट्स के अनुसार, वॉक के तुरंत बाद जो हल्कापन महसूस होता है, वह फ्लूइड रिटेंशन (पानी का जमाव) कम होने की वजह से होता है, फैट लॉस (Fat Loss) की वजह से नहीं।

अस्थायी राहत: नमक ज्यादा खाने, हार्मोनल बदलाव या घंटों बैठने से होने वाली हल्की ब्लोटिंग में यह 10 मिनट की वॉक बहुत कारगर है।

वैज्ञानिक सच: अभी तक ऐसे कोई मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं जो यह साबित करें कि 'लिंफैटिक वॉकिंग' किसी भी सामान्य ब्रिस्क वॉक (तेज चलने) से ज्यादा फायदेमंद है। दोनों ही तरीकों में मांसपेशियों का संकुचन और सांस लेना एक समान काम करता है।

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