Sagar Satna Greenfield Expressway: मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में सागर-सतना ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को अहम परियोजना माना जा रहा है। इस एक्सप्रेसवे के तैयार होने के बाद भोपाल, सागर, सतना, रीवा, प्रयागराज और वाराणसी जैसे शहरों के बीच आवागमन आसान होने की उम्मीद है।
मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम यानी MPRDC की ओर से तैयार किए जा रहे इस प्रोजेक्ट की लंबाई करीब 227 किलोमीटर बताई जा रही है। यह चार लेन का एक्सेस-कंट्रोल कॉरिडोर होगा, जिसके निर्माण पर लगभग 9,850 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके बनने से बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र को तेज सड़क संपर्क मिल सकता है।
भोपाल से वाराणसी के सफर में घट सकता है समय
फिलहाल भोपाल से वाराणसी जाने वाले यात्रियों को सतना और रीवा होकर गुजरना पड़ता है। मौजूदा रूट का बड़ा हिस्सा डबल-लेन राज्य राजमार्गों से होकर जाता है। इस वजह से करीब 760 किलोमीटर की यात्रा पूरी करने में 12 से 14 घंटे तक लग सकते हैं।सागर-सतना एक्सप्रेसवे के बनने के बाद रूट अधिक सीधा और तेज होने की उम्मीद है। इससे भोपाल-वाराणसी के बीच की दूरी में करीब 70 से 100 किलोमीटर तक की कमी आने का अनुमान है। ऐसे में यह दूरी लगभग 590 किलोमीटर के आसपास रह सकती है।एक्सप्रेसवे पर वाहनों की गति 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक रखने की योजना बताई जा रही है। इसके चलते भोपाल से वाराणसी का सफर करीब 8 घंटे में पूरा होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, वास्तविक यात्रा समय एक्सप्रेसवे के अंतिम रूट, प्रवेश और निकास बिंदुओं तथा यातायात की स्थिति पर निर्भर करेगा।
सागर और सतना के बीच भी कम होगा सफर
सागर-सतना एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा लाभ दोनों शहरों के बीच यात्रा करने वाले लोगों को मिल सकता है। अभी सागर और सतना के बीच करीब 300 किलोमीटर की दूरी बताई जाती है। प्रस्तावित ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के जरिए यह दूरी लगभग 227 किलोमीटर तक रह सकती है।इससे दोनों शहरों के बीच की दूरी करीब 73 किलोमीटर कम हो सकती है। फिलहाल जहां इस रूट पर 6 से 8 घंटे तक का समय लग सकता है, वहीं एक्सप्रेसवे बनने के बाद यात्रा लगभग 3 घंटे में पूरी होने का अनुमान है।इसके अलावा भोपाल से रीवा की कनेक्टिविटी भी बेहतर हो सकती है। प्रस्तावित कॉरिडोर के बाद भोपाल से रीवा का सफर करीब 5 से 6 घंटे में पूरा होने की संभावना जताई जा रही है।
रीवा, प्रयागराज और वाराणसी तक मजबूत होगा संपर्क
सागर-सतना एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र को विंध्य क्षेत्र से जोड़ेगा। सतना से आगे यह कनेक्टिविटी उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों तक पहुंचने में मदद कर सकती है।इस परियोजना से सतना, रीवा, प्रयागराज, मिर्जापुर और वाराणसी के बीच सड़क संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है। वहीं, भोपाल और मध्य प्रदेश के दूसरे हिस्सों से आने वाले यात्रियों तथा मालवाहक वाहनों को उत्तर प्रदेश की ओर जाने के लिए अधिक सीधा और तेज सड़क मार्ग मिल सकता है।इससे यात्रियों के समय की बचत के साथ-साथ व्यापार, परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
सागर-कोटा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से भी जुड़ने की योजना
सागर-सतना एक्सप्रेसवे की एक खास बात यह है कि इसे पश्चिम दिशा में प्रस्तावित सागर-कोटा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से जोड़ने की योजना बताई जा रही है।यदि दोनों परियोजनाओं के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित होती है, तो राजस्थान के कोटा, जयपुर और उदयपुर जैसे शहरों से उत्तर प्रदेश के वाराणसी और लखनऊ तक सड़क संपर्क और मजबूत हो सकता है। इससे मध्य प्रदेश एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप में उभर सकता है।यह कनेक्टिविटी यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है। खासकर राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच व्यापारिक आवाजाही को इससे लाभ मिलने की उम्मीद है।
DPR का काम अंतिम चरण में
सागर-सतना एक्सप्रेसवे परियोजना को मध्य प्रदेश सरकार की ओर से मंजूरी मिल चुकी है। फिलहाल इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR को अंतिम चरण में बताया जा रहा है।सर्वे का काम पूरा होने के बाद जमीन अधिग्रहण और अन्य प्रक्रियाओं पर आगे काम किया जा सकता है। परियोजना के धरातल पर आने के बाद क्षेत्र में सड़क, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।