नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश सरकार ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर राज्य के हितों से जुड़ा बड़ा फैसला हासिल किया है। 15,624 करोड़ रुपये की इस परियोजना में बिजली घटक पर हिमाचल प्रदेश की ओर से आने वाली करीब 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत का बोझ अब राज्य पर नहीं पड़ेगा। केंद्र ने सैद्धांतिक रूप से इस लागत को परियोजना के जल घटक से लाभ पाने वाले दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान राज्यों से वहन कराने पर सहमति जताई है। सरकार के मुताबिक, करीब आठ साल से अटका यह मामला अब आगे बढ़ने की स्थिति में है।
छह राज्यों ने किया समझौता
15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के क्रियान्वयन के लिए हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान ने समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुआ। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल के साथ सभी संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।
टौंस नदी पर बनेगी 422 मेगावाट की परियोजना
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना का निर्माण हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर टौंस नदी पर किया जाएगा। परियोजना की अनुमानित लागत ₹15,624 करोड़ है और इससे 422 मेगावाट बिजली पैदा होगी। परियोजना सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसका जल घटक भी महत्वपूर्ण है और इससे दिल्ली, हरियाणा तथा राजस्थान समेत कई राज्यों को पानी से जुड़ा लाभ मिलेगा।
क्यों महत्वपूर्ण है ₹2000 करोड़ वाला फैसला?
हिमाचल सरकार के मुताबिक, बिजली घटक में राज्य की हिस्सेदारी को लेकर करीब ₹2,000 करोड़ की लागत सामने आ रही थी। सरकार ने इस अतिरिक्त बोझ को उठाने पर आपत्ति जताई। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों को देखते हुए हिमाचल पर यह अतिरिक्त बोझ डालना उचित नहीं था। सरकार ने केंद्र के सामने यह तर्क भी रखा कि परियोजना के जल घटक के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत अनुदान दे रही है, इसलिए बिजली घटक के लिए भी हिमाचल को अतिरिक्त वित्तीय बोझ से राहत मिलनी चाहिए।
पहले ₹800 करोड़ देने पर बनी थी सहमति
मुख्यमंत्री के मुताबिक, पिछली सरकार ने हिमाचल की ओर से करीब ₹800 करोड़ की वित्तीय हिस्सेदारी पर सहमति जताई थी। मौजूदा सरकार ने राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और केंद्र के सामने हिमाचल के हितों का मुद्दा उठाया। सरकार का कहना है कि परियोजना के कारण हिमाचल के संबंधित क्षेत्र की आबादी को विस्थापन का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना उचित नहीं है।
हिमाचल को हर साल मिलेगी 1000 मिलियन यूनिट बिजली
परियोजना के बिजली घटक में हिमाचल प्रदेश को हर साल 1,000 मिलियन यूनिट बिजली की हिस्सेदारी मिलने की बात कही गई है। सरकार के अनुसार, परियोजना के निर्माण के बाद इससे हिमाचल को हर साल ₹1,000 करोड़ से अधिक की आय होने की संभावना है। यह आय राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों को मजबूत करने में मदद कर सकती है।
आठ साल का गतिरोध खत्म
किशाऊ परियोजना को लेकर पिछले करीब आठ वर्षों से वित्तीय हिस्सेदारी और लागत वहन करने के मुद्दे पर गतिरोध बना हुआ था। अब केंद्र की सहमति और छह राज्यों के MoU के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। हिमाचल सरकार ने इसे राज्य के हितों की रक्षा की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया है। सरकार का कहना है कि राज्य को अतिरिक्त वित्तीय बोझ से बचाने के साथ-साथ परियोजना से मिलने वाली बिजली और संभावित आय हिमाचल के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ साबित होगी।
Reported by: M. Athar Uddin Munne Bharti
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