ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा वेस्ट और शाहबेरी के रास्ते में रोजाना जाम से जूझने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने एक मूर्ति चौक से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (DME) तक करीब 7 किलोमीटर लंबे डबल डेकर फ्लाईओवर के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। करीब ₹756 करोड़ की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का मकसद शाहबेरी के संकरे और व्यस्त रास्ते पर ट्रैफिक का दबाव कम करना है।

अथॉरिटी की बोर्ड बैठक में मिली मंजूरी

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के CEO रवि कुमार एनजी के मुताबिक, यह फैसला प्राधिकरण की 144वीं बोर्ड बैठक में लिया गया। प्रस्तावित फ्लाईओवर के निर्माण से पहले नोएडा और यमुना प्राधिकरण की मंजूरी भी जरूरी होगी, क्योंकि परियोजना की अनुमानित लागत साझा की जानी है। यानी अभी इसे अंतिम निर्माण शुरू होने की मंजूरी के तौर पर नहीं, बल्कि परियोजना के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक मंजूरी के रूप में देखना चाहिए।

एक मूर्ति से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे तक कनेक्टिविटी

प्रस्तावित डबल डेकर फ्लाईओवर एक मूर्ति चौक से शाहबेरी होते हुए दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे तक कनेक्टिविटी देगा। इसकी खासियत यह होगी कि दो अलग-अलग डेक पर अलग दिशाओं का ट्रैफिक चलाया जाएगा। एक डेक ग्रेटर नोएडा वेस्ट की तरफ से आने वाले वाहनों को DME की ओर ले जाएगा, जबकि दूसरे डेक का इस्तेमाल गाजियाबाद और क्रॉसिंग रिपब्लिक की तरफ से आने वाले ट्रैफिक के लिए किया जाएगा।

शाहबेरी में क्यों जरूरी है डबल डेकर फ्लाईओवर?

शाहबेरी का मौजूदा रास्ता काफी संकरा है और इस इलाके में बड़े पैमाने पर आवासीय विकास हो चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, सड़क की चौड़ाई करीब 14 मीटर है, जबकि सामान्य चार लेन के एलिवेटेड रोड के लिए ज्यादा जगह की जरूरत होती है। इसी वजह से यहां डबल डेकर डिजाइन को विकल्प के तौर पर चुना गया है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट, शाहबेरी और क्रॉसिंग रिपब्लिक में बड़ी संख्या में रिहायशी सोसाइटियां विकसित हो चुकी हैं। इन इलाकों के बीच रोजाना बड़ी संख्या में वाहन चलते हैं, जिससे पीक आवर्स में ट्रैफिक दबाव बढ़ जाता है। प्रस्तावित फ्लाईओवर से इस कॉरिडोर पर ट्रैफिक को अलग-अलग स्तरों पर बांटने में मदद मिल सकती है।

सिर्फ फ्लाईओवर ही नहीं, 12 किमी सड़क भी

इसी बोर्ड बैठक में जुनपत से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) तक करीब 12 किलोमीटर लंबी सड़क को भी मंजूरी दी गई है। यह सड़क ग्रेटर नोएडा के प्रमुख इलाकों को EPE से जोड़ने में मदद करेगी। प्रस्ताव के अनुसार यह कनेक्टिविटी परी चौक, बोडाकी और दादरी क्षेत्र तक पहुंच को बेहतर बनाने में उपयोगी हो सकती है।

कब शुरू होगा काम

फिलहाल परियोजना की विस्तृत तकनीकी रूपरेखा और आगे की प्रक्रिया पर काम होना बाकी है। रिपोर्टों के मुताबिक, NHAI को परियोजना के डिटेल तैयार करने की जिम्मेदारी दी जानी है, जबकि निर्माण से पहले संबंधित प्राधिकरणों की मंजूरी और अन्य औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इसलिए अभी निर्माण शुरू होने या पूरा होने की निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।

अगर सभी जरूरी मंजूरियां और प्रक्रियाएं पूरी होती हैं, तो यह कॉरिडोर ग्रेटर नोएडा वेस्ट, शाहबेरी, क्रॉसिंग रिपब्लिक और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के बीच सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर करने वाली अहम परियोजनाओं में शामिल हो सकता है।

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