उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो चुकी है। चुनावी माहौल बनने लगा है और राजनीतिक दलों ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी बीच TNP News के खास कार्यक्रम ‘27 की सत्ता’ की टीम पहुंची है सीतापुर जिले की चर्चित मिश्रिख विधानसभा सीट पर, जहां जमीन पर चुनावी माहौल को समझने की कोशिश की गई।
मिश्रिख की सियासत को समझना इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि इस सीट ने पिछले कुछ दशकों में कई राजनीतिक बदलाव देखे हैं। एक दौर में यहां समाजवादी पार्टी का दबदबा रहा, जबकि 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने लगातार जीत दर्ज की। अब 2027 के चुनाव से पहले सवाल यही है कि मिश्रिख में पिछले चुनावों का ट्रेंड जारी रहेगा या फिर राजनीतिक समीकरण एक बार फिर बदलेंगे।
हमारी ग्राउंड जीरो रिपोर्ट में जानिए मिश्रिख की जनता के सामने इस समय कौन से स्थानीय मुद्दे हैं, क्षेत्र में बीते वर्षों में क्या बदलाव हुए, विकास को लेकर लोगों की क्या राय है और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर जमीन पर कैसी चर्चा है। साथ ही समझिए मिश्रिख विधानसभा का पूरा चुनावी इतिहास और वह आंकड़ा जो 2027 की सियासत को समझने में अहम हो सकता है।
मिश्रिख सिर्फ विधानसभा सीट नहीं, अपनी अलग पहचान वाला क्षेत्र
सीतापुर जिले का मिश्रिख क्षेत्र धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से भी खास पहचान रखता है। यह क्षेत्र नैमिषारण्य के कारण देशभर में जाना जाता है। नैमिषारण्य को हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में माना जाता है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। चक्रतीर्थ, ललिता देवी मंदिर और दधीचि कुंड जैसे धार्मिक स्थलों के कारण मिश्रिख-नैमिषारण्य क्षेत्र की पहचान धार्मिक पर्यटन से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में यहां सड़क, परिवहन, साफ-सफाई, पर्यटन सुविधाएं और स्थानीय रोजगार जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
वहीं विधानसभा क्षेत्र का बड़ा हिस्सा ग्रामीण इलाकों में आता है। ऐसे में खेती-किसानी, सिंचाई, बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दे भी स्थानीय राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं।
मिश्रिख विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
मिश्रिख विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। इस सीट का राजनीतिक इतिहास कई दशकों पुराना है। अलग-अलग चुनावों में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, भाजपा और बसपा समेत कई दलों का प्रभाव देखने को मिला है। अगर पिछले पांच विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो 2002 से 2012 तक लगातार तीन चुनाव समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों ने जीते। इसके बाद 2017 में भाजपा ने बड़ी जीत के साथ वापसी की और 2022 में भी सीट अपने पास बरकरार रखी।
2002 से 2022 तक जीत का आंकड़ा
| वर्ष | विजेता | पार्टी | जीत का अंतर |
| 2002 | ओम प्रकाश | सपा | 18,611 |
| 2007 | अनूप कुमार | सपा | 3,141 |
| 2012 | राम पाल राजवंशी | सपा | 1,522 |
| 2017 | राम कृष्ण भार्गव | भाजपा | 20,672 |
| 2022 | राम कृष्ण भार्गव | भाजपा | 11,465 |
यानी 2002, 2007 और 2012 में लगातार तीन बार सपा ने जीत दर्ज की, जबकि 2017 और 2022 में भाजपा ने बाजी मारी।
2022 में क्या था मिश्रिख का पूरा चुनावी गणित?
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के राम कृष्ण भार्गव ने 91,092 वोट हासिल किए। उनका वोट शेयर करीब 41.15 प्रतिशत रहा। दूसरे स्थान पर रहे सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मनोज कुमार राजवंशी को 79,627 वोट मिले, जबकि उनका वोट शेयर करीब 35.97 प्रतिशत रहा। वही बसपा के श्याम किशोर को 34,654 वोट मिले और उनका वोट शेयर करीब 15.66 प्रतिशत रहा। हालांकि भाजपा और दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार के बीच 11,465 वोटों का अंतर था।
2022 रिजल्ट एक नजर में
उम्मीदवार पार्टी वोट वोट शेयरराम कृष्ण भार्गव भाजपा 91,092 41.15%मनोज कुमार राजवंशी एसबीएसपी 79,627 35.97%श्याम किशोर बसपा 34,654 15.66%। यानि इन आंकड़ों से पता चलता है कि 2022 में भाजपा को 40 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले, जबकि दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार का वोट शेयर भी करीब 36 प्रतिशत था।
2017 में भाजपा ने कितने वोटों से जीता था चुनाव?
2017 में भाजपा के राम कृष्ण भार्गव ने मिश्रिख सीट से जीत दर्ज की थी। उन्हें 86,403 वोट मिले थे। बसपा के मनीष कुमार रावत को 65,731 वोट मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे।दोनों के बीच जीत का अंतर 20,672 वोट था। 2022 में भाजपा ने फिर जीत दर्ज की, लेकिन जीत का अंतर घटकर 11,465 वोट रह गया। हालांकि दोनों चुनावों के राजनीतिक समीकरण और उम्मीदवार अलग थे, इसलिए केवल जीत के अंतर के आधार पर सीधे निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
2012 में मुकाबला था बेहद करीबी
2012 का चुनाव मिश्रिख की राजनीति में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। समाजवादी पार्टी के राम पाल राजवंशी ने 61,346 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। वहीं बसपा के मनीष कुमार रावत को 59,824 वोट मिले थे। दोनों के बीच सिर्फ 1,522 वोटों का अंतर था। यानी उस चुनाव में कुछ हजार वोटों से भी कम का अंतर नतीजे को बदलने के लिए काफी था। यही वजह है कि 2027 में भी उम्मीदवारों और दलों के बीच वोटों के बंटवारे पर नजर रहेगी।
2002 से 2012 तक सपा का दबदबा
2002 में सपा के ओम प्रकाश ने 53,990 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। 2007 में सपा के अनूप कुमार ने 62,256 वोट हासिल किए और जीत दर्ज की। इसके बाद 2012 में राम पाल राजवंशी ने सपा के टिकट पर जीत हासिल की। इस तरह 2002 से 2012 तक लगातार तीन विधानसभा चुनावों में सपा उम्मीदवार विजयी रहे। इसके बाद 2017 में भाजपा ने समीकरण बदला और 20,672 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। 2022 में भी भाजपा ने सीट बरकरार रखी।
2027 में किन मुद्दों पर रहेगी नजर?
2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अभी उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर सामने नहीं आई है। ऐसे में किसी पार्टी या उम्मीदवार की जीत का अनुमान लगाने के बजाय पिछले चुनावों और स्थानीय मुद्दों को समझना ज्यादा जरूरी है। मिश्रिख में सड़क और ग्रामीण कनेक्टिविटी, रोजगार, खेती-किसानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसे मुद्दे स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसके अलावा इस क्षेत्र की धार्मिक पहचान को देखते हुए धार्मिक पर्यटन, यात्री सुविधाएं, सड़क संपर्क और स्थानीय रोजगार भी चर्चा के विषय हो सकते हैं।
मिश्रिख का चुनावी गणित किन चीजों से बदलेगा?
2027 की तस्वीर कई बातों पर निर्भर करेगी—
पहला, अलग-अलग दल किसे उम्मीदवार बनाते हैं।
दूसरा, विधानसभा चुनाव में कौन-कौन से गठबंधन मैदान में रहते हैं।
तीसरा, पिछले चुनावों की तरह वोटों का बंटवारा किस तरह होता है।
चौथा, स्थानीय मुद्दों में जनता की प्राथमिकता क्या रहती है।
पांचवां, पिछले चुनावों में अलग-अलग दलों को मिले वोटों का कितना हिस्सा इस बार उनके साथ बना रहता है।
2022 के आंकड़ों में भाजपा को 91,092 वोट मिले थे, जबकि दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार को 79,627 वोट मिले। बसपा के खाते में भी 34,654 वोट थे। ऐसे में 2027 में उम्मीदवार और गठबंधन की तस्वीर साफ होने के बाद इन आंकड़ों की अहमियत और बढ़ जाएगी।
2027 से पहले मिश्रिख में सबसे बड़े सवाल
मिश्रिख की जनता के लिए इस चुनाव में विकास और स्थानीय सुविधाएं कितनी बड़ी प्राथमिकता होंगी?
क्या सड़क, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में रहेंगे? नैमिषारण्य क्षेत्र के विकास और धार्मिक पर्यटन से जुड़े सवाल कितने महत्वपूर्ण होंगे? और क्या पिछले चुनावों जैसा राजनीतिक समीकरण इस बार भी देखने को मिलेगा?
यानी मिश्रिख में 2027 का चुनाव समझने के लिए सिर्फ यह देखना काफी नहीं होगा कि पिछली बार कौन जीता था। असली तस्वीर पुराने चुनावी ट्रेंड, मौजूदा स्थानीय मुद्दों और जमीन पर जनता के मिजाज को साथ रखकर ही सामने आएगी।