Supreme Court Hearing: राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेसिव रिवीजन यानी SIR के प्रक्रिया के तहत तकरीबन 33 लाख लोगों को 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' और 'अनमैप्ड' के आधार पर नोटिस जारी किया गया है। SIR प्रक्रिया के दौरा पहले ही 42 लाख नामों को हटाकर अलग किया गया है। ऐसे में अब हटाए गए नामों को लेकर लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 सदस्य बैंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई 21 सितंबर तय की है।
कोर्ट में दिए प्रशांत भूषण ने तर्क
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी.मोहन भी इस पीठ में शामिल है। कोर्ट ने अगले हफ्ते SIR से जुड़े मुद्दे को सुचीबद्ध किया है। जिसकी सुनवाई सोमवार को होनी है। 33 लाख लोगों को नोटिस देने के इस मुद्दे पर याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता प्रशांत भूषण कोर्ट में पेश हुए। जिन्होंने कोर्ट में तर्क दिया कि दिल्ली में मतदाता सूची से करीब 47 लाख लोगों का नाम हटाया गया है।
47 लाख लोगों ने नाम पहले ही लिस्ट से काटे
आपको बता दें कि याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने तर्क देते हुए कहा कि अगर 47 लाख लोगों के नाम पहले ही लिस्ट से काटे जा चुके हैं। तो चुनाव आयोग की तरफ से 33 लाख लोगों को नोटिस क्यों जारी किए गए? दरअसल भूषण ने कोर्ट में कहा कि, चुनाव आयोग ने उन लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, जिन्हें नोटिस भेजा है। न ही यह साफ किया गया है कि इस आधार पर इनके नामों को लेकर सवाल उठाए गए।
‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ और ‘अनमैप्ड’ पर सवाल
अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत में कहा कि आयोग ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि किन मतदाताओं के रिकॉर्ड में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ यानी तार्किक विसंगतियां पाई गई हैं और किन लोगों को ‘अनमैप्ड’ श्रेणी में रखा गया है. उन्होंने अदालत के समक्ष सवाल उठाया कि नोटिस पाने वाले लोगों की जानकारी और उन्हें नोटिस जारी करने के आधार सार्वजनिक नहीं किए गए हैं. इसी को लेकर याचिका में आपत्ति जताई गई है.
1.45 करोड़ की सूची में 47 लाख नाम हटाए गए
31 अगस्त को चुनाव आयोग ने दिल्ली की मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशित किया था। एसआईआर के तहत तैयार इस ड्राफ्ट में कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं वाली पिछली सूची से करीब 47 लाख नाम हटाए गए। इस तरह ड्राफ्ट मतदाता सूची में दिल्ली के करीब हर तीन में से एक मतदाता का नाम नहीं रहा. आयोग ने नाम हटाए जाने के पीछे अलग-अलग कारण बताए हैं।
43.32 लाख मतदाता स्थानांतरित या अनुपस्थित मिले
SIR के दौरान 43.32 लाख से ज्यादा मतदाता ऐसे है जो अन्य जगह चले गए थे। या सत्यापन के समय अपने पते पर उपस्थित नहीं थे। 2.82 लाख मतदाताओं ऐसे भी है जिनमें मृतों की जानकारी भी सामने निकली। आयोग की माने तो 1.41 लाख मतदाता ऐसे हैं, जिनके नाम एक से ज्यादा स्थानों पर मतदाता सूची में दर्ज पाए गए। आंकड़ों की माने तो 31 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई।
21 सिंतबर को होगी सुनवाई
दिल्ली में एसआईआर के तहत मतदाता सूची से हटे नाम और जारी नोटिस के बाद जो प्रक्रिया हुई उसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में 21 सितंबर को सुनवाई होगी। सोमवार की सुनवाई में कोर्ट के समक्ष नोटिस, ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ और ‘अनमैप्ड’ मतदाताओं से जुड़े मुद्दे रखे जाने की संभावना है।
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