उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे का नेटवर्क लगातार विस्तार ले रहा है। अब बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को चित्रकूट धाम से जोड़ने वाली चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इसके संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। खास बात यह है कि अब यह लिंक एक्सप्रेसवे छह लेन का ग्रीनफील्ड और प्रवेश नियंत्रित एक्सप्रेसवे होगा। परियोजना पर करीब 1,008.67 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
15.172 किलोमीटर लंबा होगा एक्सप्रेसवे
चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 15.172 किलोमीटर निर्धारित की गई है। यह बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के भरतकूप क्षेत्र को चित्रकूट धाम से जोड़ेगा। परियोजना का उद्देश्य चित्रकूट तक पहुंचने वाले यात्रियों और पर्यटकों को तेज और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी देना है। UPEIDA की आधिकारिक वेबसाइट पर भी चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे को प्रस्तावित परियोजनाओं में शामिल किया गया है।
4 लेन से अब 6 लेन का हुआ प्रस्ताव
इस परियोजना में एक अहम बदलाव भी किया गया है। पहले चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे को चार लेन के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव था, लेकिन संशोधित प्रस्ताव में इसे छह लेन का बनाया गया है। इसकी चौड़ाई 110 मीटर रखी गई है और इसे प्रवेश नियंत्रित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के तौर पर विकसित किया जाएगा। निर्माण ईपीसी यानी इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन मोड पर कराने की योजना है।
कहां से कहां तक जुड़ेगा?
इस लिंक एक्सप्रेसवे का शुरुआती बिंदु चित्रकूट जिले में भरतकूप के पास होगा। यह इलाका बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के शुरुआती हिस्से से जुड़ा है। दूसरी तरफ एक्सप्रेसवे चित्रकूट धाम की ओर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएगा। पुराने परियोजना विवरण में इसे वाराणसी-बांदा मार्ग के भरतकूप क्षेत्र से राष्ट्रीय राजमार्ग-135बीजी पर अहमदगंज तक जोड़ने की योजना के रूप में बताया गया था।
एक नजर में परियोजना
* लंबाई: 15.172 किलोमीटर
* लेन: 6 लेन
* प्रकार: ग्रीनफील्ड, प्रवेश नियंत्रित एक्सप्रेसवे
* चौड़ाई: 110 मीटर
* अनुमानित लागत: ₹1,008.67 करोड़
* निर्माण मॉडल: EPC
* कनेक्टिविटी: बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से चित्रकूट धाम तक
चित्रकूट जाने वाले श्रद्धालुओं को क्या फायदा?
चित्रकूट भगवान राम से जुड़े प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। नया लिंक एक्सप्रेसवे बनने के बाद बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से आने वाले यात्रियों के लिए चित्रकूट धाम तक पहुंचना ज्यादा सीधा और तेज हो सकेगा।
इसका फायदा सिर्फ स्थानीय यात्रियों को नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों से आने वाले पर्यटकों को भी मिल सकता है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के जरिए दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों से आने वाला ट्रैफिक चित्रकूट की तरफ बेहतर कनेक्टिविटी हासिल कर सकेगा। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
मध्य प्रदेश के शहरों को भी मिल सकती है बेहतर कनेक्टिविटी
चित्रकूट की भौगोलिक स्थिति उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा के करीब है। ऐसे में बेहतर एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी का असर आसपास के क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। पहले से मौजूद बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के जरिए चित्रकूट को दिल्ली और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ने की सुविधा है। UPEIDA के मुताबिक बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे चित्रकूट से शुरू होकर इटावा के पास आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़ता है।
रोजगार और कारोबार पर भी असर
परियोजना के निर्माण से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। वर्ष 2025 में परियोजना से करीब 38 लाख मानव दिवस सृजित होने का अनुमान बताया गया था। इसके अलावा बेहतर सड़क संपर्क से चित्रकूट और आसपास के क्षेत्रों में होटल, परिवहन, स्थानीय बाजार, पर्यटन और अन्य कारोबारी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
कब शुरू होगा निर्माण?
कैबिनेट से संशोधित परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद अब निर्माणकर्ता के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। रिपोर्टों के मुताबिक इसके लिए ग्लोबल बिड आमंत्रित की जानी है। यानी अभी मंजूरी के बाद अगला चरण टेंडर और एजेंसी चयन का होगा; इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि एक्सप्रेसवे का निर्माण तत्काल शुरू हो गया है।
कुल मिलाकर, चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबाई नहीं बल्कि इसका कनेक्टिविटी नेटवर्क है। यह बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को चित्रकूट धाम से जोड़ेगा और धार्मिक पर्यटन के साथ क्षेत्रीय आवागमन को भी बेहतर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना बन सकता है।
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