नई दिल्ली: भारतीय रेलवे में तेजी से हो रहे बदलावों का असर अब स्टेशनों पर काम करने वाले कुलियों की रोजी-रोटी पर भी दिखाई देने लगा है। रेलवे में आधुनिक सुविधाएं बढ़ने, यात्रियों की बदलती जरूरतों और सामान ले जाने के नए विकल्पों के चलते कुलियों की कमाई पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में कई कुलियों के सामने परिवार चलाने और भविष्य को सुरक्षित रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
आधुनिक सुविधाओं से बदल रहा रेलवे का काम
रेलवे स्टेशनों पर पहले यात्रियों को अपना सामान उठाने के लिए कुलियों की जरूरत ज्यादा पड़ती थी। खासकर बुजुर्ग यात्रियों, परिवार के साथ सफर करने वाले लोगों और भारी सामान लेकर चलने वाले यात्रियों के लिए कुली बड़ी मदद होते थे।
लेकिन अब रेलवे स्टेशनों पर एस्केलेटर, लिफ्ट, बेहतर प्लेटफॉर्म सुविधाएं और ट्रॉली जैसे विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इससे यात्रियों को अपना सामान खुद ले जाने में आसानी होती है। नतीजतन, कुछ जगहों पर कुलियों को पहले के मुकाबले कम काम मिलने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
कमाई घटने से परिवार चलाना मुश्किल
कुलियों की आमदनी काफी हद तक यात्रियों की संख्या और उन्हें मिलने वाले काम पर निर्भर करती है। उन्हें हर महीने एक जैसी कमाई नहीं होती। जिस दिन यात्रियों की आवाजाही ज्यादा होती है, उस दिन काम मिलने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं, कम भीड़ या यात्रियों के खुद सामान ले जाने से उनकी कमाई प्रभावित हो सकती है।
महंगाई के इस दौर में घर का किराया, बच्चों की पढ़ाई, राशन और इलाज जैसे खर्च उठाना भी चुनौती बन गया है। ऐसे में आमदनी में कमी आने से कुलियों और उनके परिवारों की आर्थिक परेशानी बढ़ सकती है।
भविष्य को लेकर क्यों है चिंता?
रेलवे का आधुनिकीकरण यात्रियों की सुविधा और सफर को आसान बनाने के लिए जरूरी है, लेकिन इसके साथ उन लोगों की आजीविका पर पड़ने वाले असर को भी समझना होगा, जो लंबे समय से स्टेशनों पर काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।
कुलियों के लिए नियमित आय, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और वैकल्पिक रोजगार के अवसर अहम हो सकते हैं। रेलवे स्टेशनों पर सुविधाएं बढ़ाने के साथ इन श्रमिकों की जरूरतों पर ध्यान देना भी जरूरी है, ताकि विकास के इस दौर में उनकी आजीविका पर संकट न बढ़े।
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