प्रयागराज: दिल्ली के जंतर-मंतर पर SIR रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित धरने पर रोक और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर नागरिक समाज, इलाहाबाद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संगठन ने केंद्र सरकार से जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन की अनुमति देने की मांग की है। प्रेस बयान में आरोप लगाया गया कि शांतिपूर्ण आंदोलन को रोकने के लिए दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है।
बयान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मताधिकार से वंचित किए जाने के आरोप लगाए और उनके इस्तीफे की मांग की। संगठन का कहना है कि SIR की प्रक्रिया और चुनावों की निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
प्रशांत भूषण समेत कई लोगों को हिरासत में लेने का दावा
प्रेस बयान के मुताबिक, जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से जुड़े मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके, यूट्यूबर ध्रुव राठी और रोजगार अधिकार अभियान के राष्ट्रीय समन्वयक राजेश सचान को हिरासत में लिया गया।
बयान में CPI और CPM के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है। इनमें CPI(M) के महासचिव एमए बेबी, बीजू कृष्णन और वृंदा करात के नाम शामिल हैं।
इलाहाबाद और गोरखपुर में भी कार्रवाई का आरोप
संगठन ने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे आइसा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मनीष कुमार और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में संगठन के सचिव भानु कुमार को रास्ते में ही हिरासत में ले लिया गया।
बयान में गोरखपुर में जागरूक नागरिक मंच की संयोजक 64 वर्षीय रूबी श्रीवास्तव को हाउस अरेस्ट किए जाने का भी दावा किया गया है। इसके अलावा, अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा, इलाहाबाद के पांच सदस्यों को दिल्ली में हिरासत में लेने की बात कही गई है।
दिशा छात्र संगठन के सदस्यों को लेकर भी कार्रवाई के आरोप लगाए गए हैं। बयान के अनुसार, धर्मराज, चंचल और अम्बरीश को संगठन के कार्यालय में हाउस अरेस्ट किया गया, जबकि विकास और दीपक को उनके कमरों में हिरासत में रखा गया।
मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर असर का मुद्दा उठाया
प्रदर्शन के दौरान मेट्रो और ट्रेन सेवाओं को रद्द किए जाने या प्रभावित होने से आम लोगों को हुई परेशानी पर भी चिंता जताई। संगठन का आरोप है कि प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे युवाओं को रास्ते में हिरासत में लेने और हाउस अरेस्ट करने जैसे कदम उठाए गए।
हरियाणा से बिहार तक चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल
प्रेस बयान में SIR की प्रक्रिया के संदर्भ में हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार के चुनावों की वैधता एवं निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए गए। नागरिक समाज का कहना है कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग की भूमिका निष्पक्ष होनी चाहिए और मताधिकार से जुड़े सवालों पर पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग दोहराते हुए केंद्र सरकार से जंतर-मंतर पर प्रस्तावित धरने की अनुमति देने की अपील की है।
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