Tamil Nadu News: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी। जोसेफ विजय ने चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने पीएम से इस लंबे समय से लंबित मांग पर दोबारा विचार करने और जरूरी कदम उठाने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की बेंच बनने से तमिलनाडु के साथ-साथ दक्षिण भारत के अन्य राज्यों के लोगों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
सीएम विजय ने अपने पत्र में कहा कि तमिलनाडु में सुप्रीम कोर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग पहली बार 1980 में उठाई गई थी। इसके बावजूद अब तक इस दिशा में कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष नए सिरे से उठाने और अनुकूल निर्णय सुनिश्चित कराने की अपील की।
अनुच्छेद 130 का दिया हवाला
मुख्यमंत्री विजय ने अपने पत्र में संविधान के अनुच्छेद 130 का उल्लेख किया। इसके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में या ऐसे अन्य स्थानों पर भी बैठ सकता है, जिन्हें भारत के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति की मंजूरी से निर्धारित करें।
उन्होंने बताया कि 1979 में मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन में भी इस विषय पर चर्चा हुई थी। विजय के मुताबिक, दक्षिण भारत के लोगों को अपने मामलों की सुनवाई और न्याय पाने के लिए नई दिल्ली जाना पड़ता है। ऐसे में चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की बेंच बनने से पूरे दक्षिण भारत के लोगों को फायदा होगा।
1862 में स्थापित हुआ था मद्रास हाईकोर्ट
सीएम विजय ने मद्रास हाईकोर्ट की ऐतिहासिक और कानूनी विशेषज्ञता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट देश के सबसे पुराने चार्टर्ड हाईकोर्ट में से एक है, जिसकी स्थापना 1862 में हुई थी। यहां की बार काउंसिल और वकील पेशेवर रूप से बेहद सक्षम हैं।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 7 अगस्त 2007 को सुप्रीम कोर्ट की फुल कोर्ट बैठक में इस मांग पर विचार किया गया था, लेकिन पहले के फैसलों से अलग होने का कोई आधार नहीं पाया गया। उस समय तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के आवास सहित जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा भी दिया था।
दक्षिण भारत के लोगों को दिल्ली जाने की मजबूरी से मिलेगी राहत
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान निर्माताओं की मंशा थी कि अमीर हो या गरीब, हर नागरिक को न्यायालय तक सीधी पहुंच मिले। लेकिन दक्षिण भारत के नागरिकों के लिए नई दिल्ली की दूरी एक बड़ी बाधा बनती है।
उन्होंने 13 जुलाई 2016 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी उल्लेख किया। यह आदेश WP (Civil) No। 36/2016, वी। वसंतकुमार बनाम एच।सी। भाटिया एवं अन्य मामले से संबंधित था। इसमें सुप्रीम कोर्ट की बेंच स्थापित करने के सवाल को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेजा गया था।
संसदीय समितियों और विधि आयोग की सिफारिशों का भी जिक्र
पीएम मोदी को लिखे पत्र में विजय ने संसद की स्थायी समितियों की 2004, 2006, 2008 और 2021 की सिफारिशों का हवाला दिया। इन सिफारिशों में सुप्रीम कोर्ट की क्षेत्रीय बेंच स्थापित करने की जरूरत पर जोर दिया गया था।
उन्होंने विधि आयोग की उन रिपोर्टों का भी उल्लेख किया, जिनमें स्थायी क्षेत्रीय बेंच बनाने की आवश्यकता बताई गई है।
सीएम विजय का कहना है कि चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की बेंच स्थापित होने से देश के संघीय ढांचे की भावना मजबूत होगी। इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि बेंच का नियंत्रण भारत के मुख्य न्यायाधीश के पास ही रहेगा। अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुप्रीम कोर्ट इस लंबे समय से लंबित मांग पर क्या रुख अपनाते हैं।
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