BRICS Summit 2026: दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था में BRICS का नाम पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बड़ा हुआ है। कभी सिर्फ चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं से शुरू हुआ यह समूह आज 11 सदस्य देशों तक पहुंच चुका है। भारत इस समय BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। ऐसे में समझना जरूरी है कि आखिर BRICS है क्या, इसका गठन क्यों हुआ और भारत के लिए इसका महत्व कितना बड़ा है?

सबसे पहले समझिए BRICS का मतलब क्या है?

BRICS का नाम इसके शुरुआती सदस्य देशों के अंग्रेजी नामों के पहले अक्षरों से बना है।

B यानी Brazil (ब्राजील)
R यानी Russia (रूस)
I यानी India (भारत)
C यानी China (चीन)
S यानी South Africa (दक्षिण अफ्रीका)

हालांकि शुरुआत में इसमें दक्षिण अफ्रीका शामिल नहीं था और इसे BRIC कहा जाता था। बाद में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हो गया।

BRICS को किसी सैन्य गठबंधन की तरह नहीं समझना चाहिए। यह मुख्य रूप से उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक, राजनीतिक, वित्तीय और सामाजिक सहयोग का मंच है।

BRICS की शुरुआत कैसे हुई?

BRICS की कहानी असल में 2001 से शुरू होती है। उस समय Goldman Sachs के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के लिए BRIC शब्द का इस्तेमाल किया था। इसके बाद ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने आपसी सहयोग के लिए एक मंच के तौर पर BRIC को आगे बढ़ाया। इन देशों के नेताओं की पहली औपचारिक BRIC शिखर बैठक 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुई। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका को समूह में शामिल किया गया और 2011 से यह BRICS बन गया।

यानी BRICS की शुरुआत किसी औपचारिक सैन्य या राजनीतिक संगठन के रूप में नहीं, बल्कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग के मंच के तौर पर हुई थी।

आज BRICS में कितने देश हैं?

BRICS का सबसे बड़ा बदलाव हाल के वर्षों में इसके विस्तार के बाद आया है। 2023 के जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन में नए देशों को शामिल करने का फैसला हुआ। इसके बाद मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया। इंडोनेशिया ने भी बाद में पूर्ण सदस्य के रूप में प्रवेश किया।

अब BRICS में कुल 11 सदस्य देश हैं:

1. ब्राजील
2. रूस
3. भारत
4. चीन
5. दक्षिण अफ्रीका
6. मिस्र
7. इथियोपिया
8. ईरान
9. इंडोनेशिया
10. सऊदी अरब
11. संयुक्त अरब अमीरात

भारत सरकार के अनुसार ये 11 देश मिलकर दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक GDP और करीब 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।

यही वजह है कि BRICS को अब केवल कुछ देशों का आर्थिक समूह नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रभाव रखने वाले बड़े मंच के रूप में देखा जाता है।

BRICS में नए देशों को शामिल करने की जरूरत क्यों पड़ी?

दुनिया की अर्थव्यवस्था और राजनीति लगातार बदल रही है। एशिया, अफ्रीका, मध्य-पूर्व और लैटिन अमेरिका के कई देश वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका बढ़ाना चाहते हैं। BRICS के विस्तार का एक बड़ा उद्देश्य विकासशील और उभरते देशों की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूत करना है। BRICS देश संयुक्त राष्ट्र, IMF और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं में विकासशील देशों की अधिक भागीदारी और बेहतर प्रतिनिधित्व की मांग भी करते रहे हैं। यानी इसका एक बड़ा उद्देश्य यह है कि वैश्विक फैसलों में सिर्फ पश्चिमी देशों का प्रभाव न रहे, बल्कि Global South यानी विकासशील देशों की भूमिका भी मजबूत हो।

BRICS का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक संस्थान कौन सा है?

BRICS की सबसे महत्वपूर्ण पहलों में से एक है New Development Bank यानी NDB। इसे आम तौर पर BRICS Bank भी कहा जाता है। ,इस बैंक का उद्देश्य सदस्य देशों और अन्य विकासशील देशों में बुनियादी ढांचे और सतत विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए वित्तीय मदद उपलब्ध कराना है। सड़क, ऊर्जा, पानी, परिवहन और दूसरे विकास से जुड़े क्षेत्रों में निवेश के लिए यह बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
BRICS का उद्देश्य यह भी रहा है कि सदस्य देश आपसी व्यापार और वित्तीय सहयोग में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा दें और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अपनी भूमिका मजबूत करें।

क्या BRICS अमेरिका के खिलाफ बनाया गया संगठन है?

इसे सीधे तौर पर अमेरिका विरोधी संगठन कहना सही नहीं होगा। BRICS खुद को एक सहयोग और संवाद के मंच के रूप में पेश करता है। हालांकि इसके कई सदस्य देश वैश्विक वित्तीय और राजनीतिक व्यवस्था में पश्चिमी देशों के प्रभाव को कम करने और ज्यादा बहुध्रुवीय यानी multipolar world की वकालत करते हैं। यही वजह है कि BRICS में वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, IMF और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था जैसे मुद्दे चर्चा में रहते हैं।

भारत के लिए BRICS क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत के लिए BRICS का महत्व कई स्तरों पर है।

1. चीन और रूस के साथ संवाद का मंच

BRICS भारत को चीन और रूस जैसे महत्वपूर्ण देशों के साथ एक ही बहुपक्षीय मंच पर बातचीत का अवसर देता है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और रणनीतिक मतभेद हैं, लेकिन इसके बावजूद BRICS जैसे मंच पर दोनों देशों के बीच संवाद जारी रहता है।

2. Global South में भारत की भूमिका

भारत खुद को Global South की आवाज मजबूत करने वाले देशों में प्रमुख भूमिका में देखता है। BRICS के जरिए भारत एशिया, अफ्रीका, मध्य-पूर्व और लैटिन अमेरिका के देशों के साथ सहयोग बढ़ा सकता है।

3. व्यापार और निवेश

BRICS के सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाएं बड़ी हैं। भारत के लिए इन देशों के साथ व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक और सप्लाई चेन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं हैं।

4. ऊर्जा सुरक्षा

रूस, ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे देश वैश्विक ऊर्जा बाजार में बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में BRICS भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और तेल-गैस से जुड़े रणनीतिक संबंधों का भी महत्वपूर्ण मंच बन सकता है।

2026 में BRICS की अध्यक्षता भारत के पास क्यों खास है?

भारत ने 1 जनवरी 2026 से BRICS की अध्यक्षता संभाली है। यह भारत की BRICS अध्यक्षता का चौथा अवसर है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में इसकी अध्यक्षता कर चुका है।

भारत ने रखा 2026 के लिए BRICS का थीम

BRICS 2026 का थीम भारत ने रखा है जिसका मतलब है “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” यानी जोर है—लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर। भारत ने अपनी अध्यक्षता में BRICS को ज्यादा व्यावहारिक और विकास-केंद्रित बनाने पर जोर दिया है। पूरे साल देश के अलग-अलग शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।

2026 BRICS Summit कहां और कब हो रहा है?

भारत 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इसमें BRICS सदस्य देशों के नेताओं के साथ पार्टनर देशों और Outreach Invitees के प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं। समिट में वैश्विक शासन, बहुपक्षवाद, आर्थिक सहयोग, व्यापार, सुरक्षा, तकनीक, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, जलवायु और सतत विकास जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे।

समिट में किन मुद्दों पर चर्चा होगी?

2026 की बैठक में कई बड़े वैश्विक मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं।

वैश्विक शासन व्यवस्था:

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील देशों की भूमिका और प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर चर्चा महत्वपूर्ण होगी।

व्यापार और अर्थव्यवस्था:
BRICS देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ाने, सप्लाई चेन को मजबूत करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा।

ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा:
वैश्विक संघर्षों के कारण ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति पर पड़ने वाले असर को देखते हुए यह भी अहम मुद्दा है।

तकनीक और नवाचार:
AI, डिजिटल टेक्नोलॉजी और भविष्य की अर्थव्यवस्था में सहयोग भी BRICS के एजेंडे का हिस्सा है।

जलवायु और सतत विकास:
विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त और टिकाऊ विकास से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं।

इस बार का BRICS Summit इतना अहम क्यों है?

2026 का सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक संकटों से गुजर रही है। पश्चिम एशिया में तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा और वैश्विक व्यापार में बदलाव जैसी परिस्थितियां BRICS के सामने बड़ी चुनौती हैं। BRICS के सदस्य देशों के हित हमेशा एक जैसे नहीं होते। भारत के पश्चिमी देशों के साथ भी मजबूत रिश्ते हैं, जबकि रूस और चीन की अपनी अलग रणनीतिक प्राथमिकताएं हैं। ऐसे में इतने अलग-अलग हितों वाले देशों को एक साझा एजेंडे पर लाना BRICS की बड़ी परीक्षा है।

2026 में BRICS के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

बता दें कि BRICS का विस्तार इसकी ताकत भी है और चुनौती भी। पहले पांच देशों का समूह अपेक्षाकृत छोटा था। अब इसमें 11 सदस्य हैं और इनके राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक हित कई बार एक-दूसरे से अलग हो सकते हैं।
इसलिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि BRICS में कितने देश हैं, बल्कि यह है कि क्या ये देश बड़े वैश्विक मुद्दों पर एक साझा और व्यावहारिक रणनीति बना सकते हैं?
यही 2026 के दिल्ली सम्मेलन की सबसे बड़ी परीक्षा मानी जा रही है।

क्या BRICS भविष्य में और बड़ा होगा?

BRICS ने सदस्यता बढ़ाने के साथ-साथ Partner Country व्यवस्था भी शुरू की है। 2025 में बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान को पार्टनर देशों का दर्जा दिया गया था। इससे साफ है कि BRICS केवल 11 देशों तक सीमित रहने वाला मंच नहीं है। भविष्य में इसके साथ और देशों के जुड़ने की संभावना बनी हुई है।

BRICS को लेकर भारत के लिए सबसे बड़ा फायदा क्या हो सकता है?

भारत के लिए सबसे बड़ा फायदा यह है कि उसे एक ही मंच पर चीन, रूस, ऊर्जा उत्पादक देशों और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के साथ बातचीत का अवसर मिलता है। इसके साथ ही भारत अपनी अर्थव्यवस्था, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक, स्टार्टअप, स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास के मॉडल को दूसरे देशों के सामने रख सकता है। सबसे अहम बात यह है कि भारत BRICS के जरिए एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था की वकालत कर सकता है जिसमें विकासशील देशों की आवाज पहले से ज्यादा मजबूत हो।

BRICS की शुरुआत चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह के रूप में हुई थी, लेकिन दो दशक में इसका दायरा काफी बढ़ गया है। आज 11 सदस्य देशों वाला यह मंच दुनिया की करीब आधी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।

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