Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 11 सितंबर को कारोबार की शुरुआत होते ही जोरदार बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 708 अंक से ज्यादा टूटकर 74,194 के करीब पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी करीब 1 फीसदी गिरकर 23,250 के नीचे चला गया। इस गिरावट के साथ निवेशकों की दौलत में करीब 5 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे ग्लोबल संकेतों से लेकर कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव तक कई कारण जिम्मेदार हैं।
क्यों गिरा शेयर बाजार? समझिए 3 बड़े कारण
1. मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव बना सबसे बड़ा दबाव
बाजार पर इस समय सबसे बड़ा दबाव मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का है। इस तनाव के चलते कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इसका सीधा असर ग्लोबल मार्केट सेंटीमेंट पर पड़ा और निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से पैसा निकालना शुरू किया। भारतीय बाजार में भी इसका असर देखने को मिला।
2. कच्चा तेल 108 डॉलर के पार, बढ़ी महंगाई की चिंता
ब्रेंट क्रूड की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए लंबे समय तक तेल महंगा रहने पर देश का इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है। इससे रुपये, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि महंगे क्रूड को शेयर बाजार के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है।
3. बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों का डर
अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड करीब 5 फीसदी के आसपास पहुंच गई है। वहीं भारत में भी 10 साल की बॉन्ड यील्ड 7 फीसदी के ऊपर चली गई। ऊंची यील्ड से निवेशकों के बीच ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ती है और शेयर बाजार में जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित होती है।
इन दिग्गज शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट
शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में कई बड़े शेयरों पर बिकवाली का दबाव रहा। IndiGo करीब 2.5 फीसदी, Tata Steel करीब 2.3 फीसदी और Bajaj Finance करीब 2.2 फीसदी तक नीचे रहे। वहीं बैंकिंग, मेटल और ऑटो सेक्टर में भी दबाव देखने को मिला।
इसके उलट ONGC और Oil India जैसे कुछ ऑयल शेयरों में तेजी देखने को मिली, क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से अपस्ट्रीम कंपनियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
सिर्फ भारत ही नहीं, ग्लोबल मार्केट भी दबाव में
भारतीय बाजार की गिरावट का असर ग्लोबल मार्केट की कमजोरी से भी जुड़ा है। एशियाई बाजारों में भी शुक्रवार को दबाव रहा। जापान का Nikkei 225 और दक्षिण कोरिया का Kospi दोनों में 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजार भी पिछले सत्र में तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई की चिंता के बीच कमजोर रहे।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
बाजार में फिलहाल कच्चे तेल की कीमत, मिडिल ईस्ट की स्थिति, अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद और विदेशी निवेशकों की गतिविधि अहम रहने वाली है। अगर क्रूड लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर बना रहता है तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगाई और आर्थिक विकास दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।
Note: ऐसे में आज की गिरावट को केवल एक दिन की कमजोरी के तौर पर देखने के बजाय निवेशकों की नजर इन ग्लोबल संकेतों पर रहेगी। बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
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