Bihar News: प्रवर्तन निदेशालय ने बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 2.01 करोड़ रुपये मूल्य की 5 संपत्तियों को अस्थायी तौर पर जब्त कर लिया है। इसके तहत मुख्य आरोपी कौशिक कुमार के नियंत्रण और स्वामित्व वाली कंपनी 'मेसर्स एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड' (M/S NC Print Pvt. Ltd.) की संपत्तियों पर यह कार्रवाई की गई है।
FIR की दर्ज
मनी-लॉन्ड्रिंग की जांच इकोनॉमिक ऑफेंस यूनिट पटना द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की गई थी। FIR में इंडियन पीनल कोड, 1860 के सेक्शन 120B, 420, 467 और 468, और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 के सेक्शन 66 के तहत बिहार कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के क्वेश्चन पेपर के लीक में कथित तौर पर शामिल अलग-अलग टेलीग्राम URL, मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
पेपर प्रिंट के कॉन्ट्रैक्ट से शुरू हुई साजिश
EOU की 22 अगस्त, 2024 को फाइल की गई चार्जशीट में ब्लेसिंग सिक्योर्ड प्रेस प्राइवेट लिमिटेड के मालिक कौशिक कुमार कर ने कथित तौर पर अपनी प्रॉक्सी कंपनी, कैलटेक्स मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के ज़रिए क्वेश्चन पेपर प्रिंट करने का कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए एक साज़िश रची। यह कॉन्ट्रैक्ट सेंट्रल सिलेक्शन बोर्ड ऑफ़ कांस्टेबल, बिहार ने दिया। जबकि कैलटेक्स के पास कथित तौर पर प्रिंटिंग का कोई पहले का अनुभव नहीं था और उसकी अपनी कोई प्रिंटिंग प्रेस भी नहीं थी।
एग्जाम सेंटर्स के रास्ते में लीक हुए पेपर
ED ने कहा कि इस इंतज़ाम में ब्लेसिंग सिक्योर्ड प्रेस का रोल छिपाया गया, जिसे पहले एग्जाम पेपर लीक मामलों में कथित तौर पर शामिल होने के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया था। 2023 कांस्टेबल भर्ती एग्जाम के क्वेश्चन पेपर कोलकाता से पटना लाए गए थे और कथित तौर पर दूसरे आरोपियों की मिलीभगत से एग्जाम सेंटर्स के रास्ते में लीक हो गए थे। लीक की वजह से एग्जाम कैंसिल करना पड़ा, जिससे बिहार सरकार को पैसे का नुकसान हुआ और कैंडिडेट्स पर बुरा असर पड़ा।
धोखाधड़ी, जालसाजी और क्रिमिनल साज़िश
ED की जांच में पाया गया कि ब्लैकलिस्टेड ब्लेसिंग सिक्योर्ड प्रेस के फायदेमंद मालिक कर ने पहले के मामलों से लगी पाबंदियों को दरकिनार करने के लिए अपने साथियों को डमी डायरेक्टर बनाकर कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड को बनाया। एजेंसी ने आरोप लगाया कि कैल्टेक्स ने “धोखाधड़ी, जालसाजी और क्रिमिनल साज़िश” के ज़रिए प्रिंटिंग कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया और सेंट्रल सिलेक्शन बोर्ड ऑफ़ कांस्टेबल के साथ अपने एग्रीमेंट का उल्लंघन करते हुए ब्लेसिंग सिक्योर्ड प्रेस को काम आउटसोर्स कर दिया।
बोगस ट्रांज़ैक्शन को बनाया जरिया
कैल्टेक्स को कथित तौर पर 5.9 करोड़ रुपये का एडवांस मिला, उसने फंड का सिर्फ़ कुछ हिस्सा ब्लेसिंग सिक्योर्ड प्रेस को भेजा, और 2.01 करोड़ रुपये अलग-अलग शेल कंपनियों के ज़रिए डायवर्ट कर दिए। ED ने कहा कि क्राइम की कमाई कोलकाता की शेल कंपनियों के ज़रिए की गई, जिनका असली बिज़नेस नहीं था, उन्हें बोगस ट्रांज़ैक्शन के ज़रिए भेजा गया।
कैश में बदला गया और फिर उड़ा दिया गया। टीम अभी अन्य ठीकनों का पता लगाने में जुटी है। ED ने NC प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड की जिन 5 प्रॉपर्टी को अटैच किया है। इसके साथ एक और अन्य कंपनी है। जिसपर मालिकाना हक मुख्य आरोपी के पास ही है। ED की माने तो कीमत पर यह प्रॉपर्टी अटैच की गई है। ED आगे की जांच चल रही है।
घोटाले का तरीका
प्रश्नपत्र छपाई का ठेका 'कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स' (Caltex Multiventures Pvt. Ltd.) को मिला था, जिसे इस काम के लिए 5.90 करोड़ रुपये अग्रिम मिले थे। नियमों का उल्लंघन करते हुए यह छपाई का काम 'ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस' को सौंप दिया गया था और कोलकाता से पटना लाने के दौरान प्रश्नपत्र लीक हो गया था।अग्रिम राशि में से 2.01 करोड़ रुपये को कोलकाता की विभिन्न फर्जी (शेल) कंपनियों के जटिल नेटवर्क के जरिए इधर-उधर ट्रांसफर किया गया और बाद में नकद में बदल दिया गया। धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत इन पैसों के बराबर मूल्य की कौशिक कर से जुड़ी कंपनी की 5 संपत्तियां अटैच की गई हैं।
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