Brain Stroke: स्ट्रोक एक गंभीर बीमारी है, जो दिमाग तक खून की सप्लाई रुकने या दिमाग की कोई नस फटने के कारण होती है। इससे दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है। कई बार व्यक्ति को सोते समय स्ट्रोक आ जाता है और उसे इसकी जानकारी सुबह उठने पर होती है। इसे वेक-अप स्ट्रोक कहते हैं। इसमें व्यक्ति रात को सोने से पहले बिल्कुल ठीक होता है, लेकिन सुबह उठने पर शरीर में कुछ बदलाव महसूस करता है।

सोते समय क्यों आता है स्ट्रोक?

स्ट्रोक किसी भी समय आ सकता है, यहां तक कि सोते समय भी। ऐसा तब होता है, जब दिमाग तक खून पहुंचाने वाली नस में खून का थक्का जम जाता है या कोई नस फट जाती है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारियां इसका खतरा बढ़ाती हैं। इसके अलावा धूम्रपान, खराब खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी स्ट्रोक की वजह बन सकती है।

सुबह उठते ही दिख सकते हैं ये लक्षण

वेक-अप स्ट्रोक के लक्षण सुबह उठने पर नजर आ सकते हैं। इन्हें पहचानना बेहद जरूरी है। शरीर के एक तरफ हाथ या पैर में अचानक कमजोरी होना।
चेहरे का एक तरफ झुक जाना। बोलने या दूसरों की बात समझने में परेशानी होना। अचानक धुंधला दिखाई देना। चक्कर आना या चलते समय संतुलन बिगड़ना। अचानक बहुत तेज सिरदर्द होना। इन लक्षणों को थकान या नींद की कमी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

स्ट्रोक आने पर तुरंत क्या करें?

अगर सुबह उठने पर किसी व्यक्ति में स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत एंबुलेंस बुलाएं और उसे अस्पताल पहुंचाएं। डॉक्टर को बताएं कि व्यक्ति को आखिरी बार कब बिल्कुल ठीक देखा गया था। इससे इलाज तय करने में मदद मिलती है।

स्ट्रोक के इलाज में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। कुछ मरीजों को खून का थक्का हटाने या खून का बहाव दोबारा शुरू करने के लिए विशेष इलाज दिया जा सकता है। मरीज को खुद से एस्पिरिन या कोई दूसरी दवा न दें, क्योंकि स्ट्रोक खून का थक्का जमने या नस फटने, दोनों कारणों से हो सकता है। स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर इंतजार न करें। तुरंत मेडिकल मदद लेना मरीज की जान बचाने और गंभीर नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है।

Disclaimer: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है, मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है।

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