मुंबई: संस्कार भारती के ‘सिनेटॉकीज’ कार्यक्रम में  शनिवार 31 अक्टूबर को लघु फिल्म ‘एक्स्ट्रा इनिंग’ का प्रदर्शन किया गया। प्रमोद सिंह द्वारा निर्देशित इस फिल्म को दर्शकों ने काफी पसंद किया। वृद्धाश्रम की पृष्ठभूमि पर आधारित यह फिल्म बुजुर्गों की सामाजिक स्थिति, उनकी प्रतिभा, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।  

 वृद्धाश्रम की पृष्ठभूमि पर आधारित लघु फिल्म ‘एक्स्ट्रा इनिंग’

फिल्म का मूल संदेश है कि प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई हुनर होता है। यदि उसकी प्रतिभा को पहचाना जाए और उसका सही उपयोग किया जाए, तो व्यक्ति किसी भी उम्र में आत्मनिर्भर बनकर सम्मानपूर्वक जीवन जी सकता है। फिल्म समाज को बुजुर्गों के प्रति अपनी सोच बदलने और उनकी क्षमताओं को पहचानने के लिए प्रेरित करती है। फिल्म के निर्माता प्रकाश वीर आर्य हैं, जिन्होंने फिल्म में मुख्य भूमिका भी निभाई है। अरुण शेखर भी फिल्म में प्रमुख भूमिका में नजर आए हैं।

सामाजिक सरोकारों और प्रस्तुति को लेकर हुई चर्चा

फिल्म प्रदर्शन के उपरांत वरिष्ठ पत्रकार रूना आशीष ने फिल्म के निर्देशक प्रमोद सिंह और फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले अभिनेता अरुण शेखर से फिल्म के कथ्य, उसके सामाजिक सरोकारों और प्रस्तुति को लेकर चर्चा की। इस संवाद में उपस्थित दर्शकों ने भी सक्रिय सहभागिता की। फिल्म के विषय और उसके संदेश को लेकर हुई चर्चा ने कार्यक्रम को और अधिक सार्थक बनाया। इस अवसर पर संस्कार भारती के मुंबई महानगर अध्यक्ष ऋषिकेश जोशी, प्रान्त मंत्री जगदीश निषाद, कार्यक्रम संयोजक वंदिता चक्रदेव तथा फिल्म निर्माता उदय शंकर पानी की विशेष उपस्थिति रही।

सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं: पत्रकार रूना आशीष

सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्मों के प्रदर्शन और उन पर सार्थक संवाद के उद्देश्य से आयोजित ‘सिनेटॉकीज’ का यह कार्यक्रम सफल रहा। फिल्म प्रदर्शन के साथ दर्शकों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता जगाने और सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा देने का सशक्त माध्यम भी है।