आज बच्चों के बैग में किताबों और कॉपियों के साथ AI टूल्स भी पढ़ाई का हिस्सा बनते जा रहे हैं। कोई सवाल समझ न आए तो AI से जवाब पूछ लिया, नोट्स बनाने हों तो उसकी मदद ले ली और होमवर्क भी आसानी से पूरा हो गया। इससे समय की बचत होती है और सीखने के नए रास्ते खुलते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या AI बच्चों को वास्तव में सिखा रहा है या सिर्फ उनका काम आसान बना रहा है?

बच्चों में AI की बढ़ती निर्भरता ने बढ़ाई चिंता

AI पर बढ़ती निर्भरता को लेकर शिक्षकों और अभिभावकों की चिंता भी बढ़ रही है। आशंका है कि हर सवाल का तैयार जवाब मिलने से बच्चों की सोचने, समझने और याद रखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। कुछ शोधों में यह संकेत मिला है कि AI की मदद से होमवर्क का प्रदर्शन बेहतर हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि परीक्षा में भी बच्चे बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

जवाब मिलना और सीखना अलग-अलग बातें

समस्या तब शुरू होती है, जब बच्चे सवाल को समझने की कोशिश किए बिना सीधे AI से उसका उत्तर मांगते हैं। असाइनमेंट पूरा हो जाता है, लेकिन विषय की समझ अधूरी रह सकती है। AI के जवाब को बिना जांचे सही मान लेने से गलत जानकारी सीखने का जोखिम भी रहता है।

AI के इस्तेमाल से बच्चों की सोचने की क्षमता पर असर

जब बच्चा जवाब को समझने, उसकी जांच करने और अपने शब्दों में लिखने के बजाय सीधे कॉपी करके जमा कर देता है, तो उसकी स्वतंत्र रूप से सोचने और समस्याएं हल करने की आदत कमजोर पड़ सकती है। हालांकि, AI का असर हर बच्चे और हर विषय पर एक जैसा नहीं होता। इसका परिणाम इस बात पर निर्भर करता है कि उसका इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है।

AI का इस्तेमाल कैसे करें?

AI को पढ़ाई का विकल्प नहीं, बल्कि मददगार बनाना जरूरी है। बच्चों को पहले किताब से खुद पढ़ना चाहिए और फिर कठिन हिस्सों को समझने के लिए AI की मदद लेनी चाहिए। इसके बाद AI बंद करके अपने शब्दों में जवाब लिखना और खुद सवाल हल करना उपयोगी है।

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AI से मिली जानकारी को पाठ्यपुस्तक या भरोसेमंद स्रोतों से जांचना भी जरूरी है। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर AI अभ्यास, गलतियां सुधारने और मुश्किल विषय समझने में मदद कर सकता है। वहीं, AI की उपयोगिता इस बात में है कि वह बच्चों को कितना स्वतंत्र बनाता है, न कि उनका कितना काम खुद कर देता है।