Strait of Hormuz: अमेरिका और ईरान के बीच जारी टेंशन ने दुनिया के कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लगातार हो रहे हमले ने कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। बता दें कि पिछले 3 दिनों में इस क्षेत्र में भारतीय क्रू वाले 3 जहाजों पर हमले हुए हैं। इनमें से एक हमला रविवार को ही एमटी वाल्थेरा पर हुआ था जबकि दूसरा हमला 9 अक्टूबर को एमटी जेम नंबर 2 पर हुआ।
भारत ने जहाजों पर होने वाले हमले तुरंत रोकने को कहा है। जिसने गंभीर संकट पैदा कर दिया है। इस मामले पर ईरान ने सीधे तौर पर धमकी दे दी है। आईए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान की खुली धमकी
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि तेहरान का अहम एनर्जी कॉरिडोर पर पूरा कंट्रोल है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक विदेशी सैन्य आक्रामकता और आर्थिक नाकेबंदी जारी रहेगी, तब तक इस इलाके में सुरक्षा बहाल नहीं हो सकती। हालात के बारे में अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए बघाई ने ज़ोर देकर कहा कि बाज़ार की असलियत वॉशिंगटन के आधिकारिक बयान से अलग है।
बघाई ने कहा, "अमेरिकियों के दावे ज़मीनी हकीकत से मेल नहीं खाते हैं। वे कहते रह सकते हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) अब असरदार नहीं रहा और ईरान ने अपनी बढ़त खो दी है। लेकिन हम अपना काम कर रहे हैं।"
जहाजों पर हमलों के पीछे क्या है असली वजह?
होर्मुज में बढ़ते खतरे के पीछे केवल एक घटना नहीं, बल्कि कई रणनीतिक कारण हैं। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष, समुद्री नाकेबंदी, तेल निर्यात को लेकर विवाद और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर नियंत्रण की कोशिशों ने स्थिति को जटिल बना दिया है।
ईरान के लिए होर्मुज रणनीतिक दबाव बनाने का अहम माध्यम है। दूसरी ओर, अमेरिका और खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा उत्पादक देशों के लिए इस मार्ग से तेल की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना महत्वपूर्ण है। जहाजों पर हमलों और चेतावनियों के कारण शिपिंग कंपनियों को अपने मार्ग, सुरक्षा और बीमा लागत पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है।