Strait of Hormuz: मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-ईरान तनाव के बीच एक समुद्री रास्ता पूरी दुनिया की चिंता का कारण बना हुआ है। यह रास्ता है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz), जिसे ईरान अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। इसकी अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां पैदा होने वाला कोई भी बड़ा संकट दुनिया के तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कई देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने भी यह समुद्री रास्ता एक बड़ी रणनीतिक चुनौती बन गया है। आइए आपको बताते है क्या है इसके मायने।

क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसके एक तरफ ईरान है, जबकि दूसरी तरफ ओमान और संयुक्त अरब अमीरात का क्षेत्र स्थित है।

इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि दुनिया के कई प्रमुख तेल उत्पादक देशों को अपना कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मुताबिक, वर्ष 2025 में इस रास्ते से प्रतिदिन औसतन करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का परिवहन हुआ। यह दुनिया के समुद्री रास्तों से होने वाले तेल व्यापार का लगभग 25 फीसदी है। यहां से गुजरने वाले तेल का करीब 80 फीसदी हिस्सा एशियाई देशों की ओर जाता है।

ईरान के लिए कैसे बन गया ब्रह्मास्त्र?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की भौगोलिक स्थिति ईरान को रणनीतिक बढ़त देती है। इस समुद्री रास्ते के उत्तरी हिस्से में ईरान की लंबी तटरेखा है। ऐसे में क्षेत्र में उसकी सैन्य मौजूदगी और समुद्री गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को प्रभावित कर सकती हैं।

ईरान के पास मिसाइल, ड्रोन, समुद्री माइंस और तेज गति वाली छोटी नौकाओं जैसी सैन्य क्षमताएं हैं। इनका इस्तेमाल करके वह इस क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा और समुद्री आवाजाही के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि ईरान को इस रास्ते पर पूरी तरह कब्जा करने की जरूरत नहीं है। अगर जहाजों को हमले, माइंस या अन्य सुरक्षा खतरों का डर सताने लगे, तो शिपिंग कंपनियां अपने जहाजों की आवाजाही कम कर सकती हैं। इससे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने का दबाव बन सकता है। 

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