Mecca Pact: मिडिल ईस्ट में हूती विद्रोहियों का तांडव लगातार जारी है। हूती लगातार सऊदी अरब के कई इलाकों में हमले का दावा कर रहे है। हूतियों ने रियाद एयरपोर्ट, अरामको से जुड़े एक ठिकाने और दूसरे सैन्य एवं रणनीतिक स्थानों को निशाना बनाने का दावा किया है। इसके जवाब में सऊदी ने भी मोर्चा खोल दिया है।
यमनी बलों ने बाब-अल-मंदब के आसपास हूती कब्जे वाले इलाकों के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है। जिसमे उनको बड़ी कामयाबी मिली है। अब मक्का पैक्ट के तहत पाकिस्तान और तुर्की अपनी सेनाओं को सऊदी अरब भेजेंगे। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सऊदी, पाक और तुर्की मिलकर हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हमला करेंगे।
सऊदी अरब के रक्षा मंत्री ने दी अहम जानकारी
सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान अल सऊद ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जानकारी देते हुए लिखा,
The Emergency Meeting of the Strategic Political and Defense Committee under the Makkah Alliance for Defense reaffirmed the solidarity and unity of our countries in confronting the heinous attacks against the Kingdom and the holy sites. The committee agreed to activate collective deterrence measures within the framework of the Alliance in response to the attacks and all those responsible for them.
— Khalid bin Salman خالد بن سلمان (@kbsalsaud) October 5, 2026
'मक्का डिफेंस अलायंस के तहत स्ट्रैटेजिक पॉलिटिकल एंड डिफेंस कमिटी की इमरजेंसी मीटिंग में, किंगडम और पवित्र स्थलों पर हुए भयानक हमलों का सामना करने में हमारे देशों की एकजुटता और एकता को फिर से दोहराया गया। कमिटी ने इन हमलों और इनके लिए ज़िम्मेदार लोगों के जवाब में अलायंस के दायरे में सामूहिक रूप से रोकने के उपाय (collective deterrence measures) लागू करने पर सहमति जताई'।
क्या है मक्का पैक्ट
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने अगस्त 2026 में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत तीनों देशों में यह समझौता हुआ था कि किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला तीनों के खिलाफ हमला माना जाएगा।यानी अगर सऊदी अरब पर बाहरी सैन्य हमला होता है और समझौते की शर्तें लागू होती हैं,
तो पाकिस्तान और तुर्की से सैन्य सहयोग की व्यवस्था सामने आ सकती है। यही कारण है तुर्की और पाकिस्तान अपनी सेनाओं को सऊदी अरब भेज रही है, ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
क्या होगा पाकिस्तान, तुर्की का अगला कदम
5 अक्टूबर को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के अधिकारियों की रियाद में आपात बैठक हुई। इसके बाद तीनों देशों ने सहमत सैन्य बलों और क्षमताओं की व्यवस्था कर उन्हें सऊदी अरब में तेजी से तैनात करने के लिए कदम उठाने पर सहमति जताई।
इसका मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान और तुर्की की सेनाएं सीधे यमन में जाकर हूतियों से युद्ध शुरू कर देंगी। मौजूदा जानकारी के मुताबिक समझौते का तत्काल फोकस सऊदी अरब की रक्षा और उसकी सैन्य क्षमता को मजबूत करना है। क्योंकि हूती विद्रोही की तरफ से लगातार सऊदी अरब में हमले की बात कही जा रही है, जिसके बाद यह फैसला लिया गया था।
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