नई दिल्ली: पिछले कुछ सालों में भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। इंडिया लगातार सुपर पावर देशों को चुनौती दे रहा है। यही चीज कुछ देशों को अच्छी नहीं लग रही है। कुछ महीनों से भारत को लगातार अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है। अमेरिका की तरफ से लगातार दबाव बनाया जा रहा है, ताकि अमेरिका भारत में अपना पैर पसार सके।

इसके इतर भारत ने साफ कह दिया है कि वह सबसे पहले अपने देश और लोगों के हितों की रक्षा करेगा। इसी कड़ी में अब एलन मस्क की एंट्री हो चुकी है। मस्क ने भारत सरकार और अंबानी पर कई तरह के आरोप लगाए है। साथ ही भारत में भी कई तरह के विरोध प्रदर्शन जारी है जो शक को और गहराता है। आईए समझते है क्या इसके मायने।

एलन मस्क से ट्वीट से गहराया शक

दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क ने कटाक्ष करते हुए अपने एक्स हैंडल पर जारी लिखा, "आदरणीय प्रधानमंत्री अंबानी, कृपया मेरी विनम्र माफ़ी स्वीकार करें कि मुझे यह एहसास नहीं हुआ कि आप ही भारत के असली बॉस हैं। ज़ाहिर है, आप भारत के महान लोगों का एकाधिकारवादी शोषण जारी रखना चाहेंगे, लेकिन क्या आप फिर भी स्टारलिंक को मुक़ाबला करने की अनुमति देने पर विचार करेंगे?

भारत में कई ऐसे इलाके हैं - जैसा कि सभी देशों में होता है - जहाँ इंटरनेट की सुविधा नहीं है। इससे बच्चों को शिक्षा का मौका नहीं मिल पाता और छोटे व्यवसायों को अपने सामान को वैश्विक बाज़ार में बेचने का अवसर नहीं मिलता। स्टारलिंक उनकी ज़िंदगी को बेहतर बना सकता है। धन्यवाद"।

क्या विदेशी शक्तियां भारत पर बनान रही हैं दबाव?

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में देश अक्सर व्यापार, तकनीक, रक्षा समझौतों और कूटनीति के जरिए एक-दूसरे पर दबाव बनाते हैं। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता इसका एक उदाहरण है। ट्रंप लगातार 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दे रहे है। पिछले कई महीनों से अमेरिका और भारत के बीच डील को लेकर बात नहीं बन रही है। चीन के बाद भारत ही है जिसकी अर्थव्यवस्था दुनिया में तेजी से आगे बढ़ी रही है। यही कारण है कि कई विदेशी शक्तियां भारत को अस्थिर करने में लगी हुई है। अब एलन मस्क के ट्वीट ने शक और गहरा दिया है।

भारत की बढ़ती ताकत से क्यों बदल रहे हैं वैश्विक समीकरण?

भारत अब केवल एक बड़ा बाजार नहीं है, बल्कि रक्षा, तकनीक, अंतरिक्ष, ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भी अपनी भूमिका बढ़ा रहा है। भारत की विदेश नीति का एक प्रमुख हिस्सा यह है कि वह किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग देशों के साथ अपने संबंध बनाए रखे। कार्नेगी एंडोमेंट की मार्च 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखने और विभिन्न देशों के साथ संतुलित संबंध रखने की नीति पर काम कर रहा है।

इसका मतलब है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेना चाहता है। यही नीति कभी-कभी बड़ी शक्तियों के साथ मतभेद भी पैदा कर सकती है। यह तो साफ है कि भारत बिना किसी के दबाव में आकर अपने हितो की रक्षा कर रहा है। जो सुपपावर देशों को खटक रही है।

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