India-America Defence Ties: अमेरिका के आगे गिड़गिड़ाने वाले पाकिस्तान की चिंता एक बार फिर बढ़ने वाली है क्योंकि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को लेकर फिर हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। हाल के घटनाक्रमों ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच रिश्ता सिर्फ हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सैन्य अभ्यास, तकनीकी सहयोग, सूचना साझा करने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक तालमेल तक पहुंच चुका है।

दरअसल यूनाइटेड स्टेट्स पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो भारत के दौरे पर थे। जहां उन्होंने सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की, तो वहीं दूसरी तरफ रक्षा सहयोग को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी बातचीत हुई।

भारत में अमेरिकी राजदूत ने दी अहम जानकारी

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, "भारत में एडमिरल सैमुअल पापरो की मेज़बानी करना सम्मान की बात है। अमेरिका के सबसे अहम सैन्य नेताओं में से एक, एडमिरल पापरो U.S. पैसिफिक कमांड के प्रमुख हैं। यह देश की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी भौगोलिक कॉम्बैटेंट कमांड है, जो दुनिया के लगभग आधे हिस्से में फैले क्षेत्र में करीब 4,00,000 सैन्य और नागरिक कर्मियों की देखरेख करती है।

एडमिरल पापरो ने भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, आर्मी चीफ जनरल धीरज सेठ, वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित, चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल तेजिंदर सिंह और अन्य वरिष्ठ भारतीय रक्षा अधिकारियों के साथ एक शाम बिताई। इस कार्यक्रम में यूएस -भारत 'मेजर डिफेंस पार्टनरशिप' की बढ़ती ताकत, महत्वाकांक्षा और महत्व पर ज़ोर दिया गया"।

चीन और पाकिस्तान पर क्या होगा असर?

भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग ऐसे समय में हो रहा है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की सैन्य गतिविधियां लगातार रणनीतिक चिंता का विषय बनी हुई हैं। भारत के लिए समुद्री सुरक्षा, सीमा सुरक्षा और नई सैन्य तकनीक महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।

दूसरी तरफ पाकिस्तान भी अमेरिका के साथ अपने रक्षा संपर्क को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में अमेरिकी ड्रोन कंपनी Powerus ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय के साथ एक सीमित procurement order और MoU की घोषणा की थी। दिलचस्प बात यह है कि यही कंपनी भारत में भी ड्रोन इंटरसेप्टर तकनीक को लेकर काम कर रही है।

कहीं ना कहीं दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग ने पाकिस्तान, चीन जैसे पड़ोसी मुल्कों की नींद उड़ दी है।