El Nino: दुनियाभर में अल नीनो का कहर शुरू होने वाला है, जिसमे लाखों लोगों की मौत हो सकती है। सबसे अहम बात है कि सर्दियों के समय यह अपने चरम पर होगा। इसके अलावा अगले कुछ महीनों में पूरी दुनियाभर में बीमारियों का दौर शुरू होने की संभावना है। इस बार El Nino इतना ताकतवर है कि इसका सबसे ज्यादा प्रकोप दिसंबर में दिखेगा। सबसे डरावनी बात यह है कि ये 1950 के बाद सबसे खतरनाक बताया जा रहा है। आलम यह है की पूरी धरती लाल नजर आ रही है।
El Nino ने दुनिया की क्यों बढ़ाई टेंशन?
अगर अल नीनो की बात करें तो यह प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म होने की स्थिति है। यह प्राकृतिक जलवायु चक्र ENSO का एक हिस्सा है, जिसका असर दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम के पैटर्न पर पड़ता है। सामान्य परिस्थिति में प्रशांत महासागर के ऊपर चलने वाली हवाएं गर्म पानी को पश्चिम की ओर धकेलती हैं। जिससे तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म होता है।
अल नीनो से लाखों लोगों की होगी मौत!
एक्सपर्ट के मुताबिक अल नीनो से कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है। तापमान में बढ़ोतरी, सूखे और अत्याधिक बारिश जैसी परिस्थितियों के कारण कई तरह की बीमारियां जन्म ले सकती है। शिकागो यूनिवर्सिटी के क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस अल नीनो से जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच दुनियाभर में करीब 4.51 लाख अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। जो एक चिंता का विषय बना हुआ है।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
भारत में अल नीनो का सबसे अहम संबंध दक्षिण-पश्चिम मानसून से माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से अल नीनो की कई घटनाओं के दौरान भारत में मानसूनी बारिश सामान्य से कम रही है।
खेती पर दबाव - धान, दालों और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई और पैदावार प्रभावित हो सकती है। बारिश कम होने पर किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।
पानी की किल्लत - कम बारिश से जलाशयों, तालाबों और भूजल पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरों में भी महसूस हो सकता है।
खाद्य महंगाई - अगर फसलों का उत्पादन घटता है, तो कुछ खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, कीमतों पर असर उत्पादन, सरकारी नीतियों, भंडार और आपूर्ति व्यवस्था पर भी निर्भर करेगा।
गर्मी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं - अधिक तापमान और लंबे समय तक गर्म मौसम रहने से हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और काम करने की क्षमता में कमी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
यानि यह तो साफ है कि सिर्फ बीमारियां ही नहीं, दुनिया में एक भारी संकट मंडरा रहा है।
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