Bangladesh: बीते कुछ महीनों से बांग्लादेश और भारत की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। वहीं अब पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश बंगाल की खाड़ी की तरफ देख रही है जो भारत के लिए एक चिंता का विषय है। खाड़ी भारत के लिए सिर्फ समुद्री इलाका नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक ताकत का अहम केंद्र है।


यही वजह है कि इस क्षेत्र में बांग्लादेश, पाकिस्तान और चीन की बढ़ती गतिविधियों पर भारत की नजर बनी हुई है। खासकर 2026 में पाकिस्तान की नई पनडुब्बियों और बांग्लादेश में चीन की बढ़ती मौजूदगी ने भारत के पूर्वी समुद्री मोर्चे को लेकर रणनीतिक चिंताएं बढ़ाई हैं।

बंगाल की खाड़ी पर क्यों बढ़ी चिंता?

भारत की पूर्वी तटरेखा बंगाल की खाड़ी से जुड़ी है। इसी समुद्री क्षेत्र में विशाखापत्तनम स्थित ईस्टर्न नेवल कमांड, अंडमान-निकोबार कमांड और भारत के कई महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते मौजूद हैं। हिंद महासागर से दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर जाने वाले कई महत्वपूर्ण Sea Lines of Communication भी इसी क्षेत्र से गुजरते हैं।

यानी अगर बंगाल की खाड़ी में किसी बाहरी शक्ति की सैन्य या निगरानी क्षमता बढ़ती है, तो इसका सीधा असर भारत की समुद्री सुरक्षा पर पड़ सकता है।

बांग्लादेश में चीन की बढ़ती मौजूदगी

भारत की सबसे बड़ी चिंता केवल बांग्लादेश नहीं, बल्कि बांग्लादेश में चीन के बढ़ते रणनीतिक प्रभाव को लेकर है। हाल के महीनों में चीन और बांग्लादेश के बीच आर्थिक, इंफ्रास्ट्रक्चर और रक्षा सहयोग बढ़ा है। मोंगला और चटगांव जैसे बंदरगाहों के आसपास चीनी गतिविधियां भारत के लिए खास रणनीतिक महत्व रखती हैं।

जून 2026 में बांग्लादेश ने मोंगला पोर्ट के पास चीनी कंपनी के साथ आर्थिक क्षेत्र विकसित करने का समझौता किया था। यह जमीन पहले भारतीय आर्थिक क्षेत्र के लिए निर्धारित थी। इसके साथ लाख कोशिशों के बाद भी बांग्लादेश और भारत के रिश्तें सुधरने का नाम नहीं ले रहे है।

भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

असल चुनौती यह नहीं है कि पाकिस्तान या बांग्लादेश तुरंत भारत के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई करने जा रहे हैं।  चिंता इससे ज्यादा व्यापक है। अगर बंगाल की खाड़ी में चीन की रणनीतिक मौजूदगी बढ़ती है और उसके साथ पाकिस्तान की नौसैनिक क्षमता भी पूर्वी दिशा में पहुंचने लगती है,

तो भारत को अपनी पश्चिमी और पूर्वी दोनों समुद्री सीमाओं पर एक साथ ज्यादा संसाधन लगाने पड़ सकते हैं।