TNP News 27 Ki Satta: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी सरगर्मी तेज होने लगी है। महराजगंज की फरेंदा विधानसभा सीट पर भी राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और दावों का दौर शुरू हो गया है। कोई सड़क और विकास कार्यों को अपनी उपलब्धि बता रहा है, तो कोई शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मुद्दे पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस, बीजेपी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के समर्थक अपने-अपने दावे कर रहे हैं, लेकिन फरेंदा की जनता किसके कामकाज से संतुष्ट है और किससे नाराज?
TNP News की खास पेशकश ‘27 की सत्ता’ में फरेंदा विधानसभा की ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए जानिए अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं, समर्थकों और स्थानीय युवाओं की राय। इस रिपोर्ट में विकास के दावों से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की चुनौतियों तक, उन मुद्दों को समझने की कोशिश की गई है, जो 2027 के चुनाव में चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।
फरेंदा में कांग्रेस, बीजेपी, सपा और बसपा के अपने-अपने दावे
फरेंदा में कांग्रेस के मीडिया प्रभारी जय प्रकाश लाल ने कहा कि उनके विधायक ने क्षेत्र में काफी काम किया है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के साथ किसी विवाद से भी इनकार किया। वहीं, बीजेपी की नगर पंचायत अध्यक्ष राजेश जायसवाल ने आगामी चुनाव में अपनी पार्टी की जीत का दावा किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार में युवा सुरक्षित हैं और 2014 से पहले के मुकाबले क्षेत्र की सड़कों की स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने मौजूदा सड़क व्यवस्था को बेहतर बताते हुए विकास कार्यों का जिक्र किया। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव अमित चौबे ने कन्या इंटर कॉलेज का उल्लेख करते हुए इसे सपा सरकार के कार्यकाल की उपलब्धि बताया। उन्होंने मौजूदा सरकार पर झूठे वादे करने और चंदे से जुड़े मामलों को लेकर आरोप लगाए।
बहुजन समाज पार्टी के युवा नेता संजय कुमार राव ने भी अपनी पार्टी की स्थिति को मजबूत बताया। उन्होंने दावा किया कि बसपा का वोट बैंक बरकरार है और आगामी चुनाव में उनकी पार्टी की सरकार बनेगी। अलग-अलग दलों के इन बयानों से साफ है कि फरेंदा में चुनावी माहौल को लेकर राजनीतिक दावों का दौर शुरू हो चुका है। हालांकि, इन दावों का वास्तविक चुनावी असर क्या होगा, यह मतदाताओं के रुख और चुनाव के नतीजों से ही स्पष्ट होगा।
‘27 की सत्ता’ में रोजगार और वोट कटने का मुद्दा भी उठा
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान पूर्व जिला पंचायत सदस्य डॉ. रामनरायण चौसरिया ने रोजगार के साथ मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने एसआईआर (SIR) के संदर्भ में वोट कटने का मुद्दा उठाते हुए करीब 13 करोड़ वोट कटने का आंकड़ा बताया। इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
रोजगार और मतदाता सूची जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा को स्थानीय विकास से आगे ले जाते हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आने वाले समय में राजनीतिक दल इन सवालों पर क्या जवाब देते हैं और मतदाताओं के सामने कौन-से मुद्दे प्राथमिकता पाते हैं।
स्थानीय युवाओं ने उठाए शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास पर सवाल
TNP News की ग्राउंड रिपोर्ट में स्थानीय युवाओं की राय भी सामने आई। एक युवक ने कहा कि क्षेत्र में काम अच्छा हुआ है और उसके मुताबिक पूर्व विधायक ने मौजूदा विधायक से ज्यादा काम किया था। वहीं, एक अन्य युवक ने फरेंदा में कॉलेज और विश्वविद्यालय की कमी का मुद्दा उठाया। उसने गोरखपुर में उच्च शिक्षा के संस्थानों का जिक्र करते हुए कहा कि फरेंदा में शिक्षा के अवसरों का विस्तार होना चाहिए। उसने यह भी कहा कि वह ब्राह्मण परिवार से होने के बावजूद आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी को वोट देगा।
एक अन्य स्थानीय युवक ने शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर नाराजगी जताई। उसका आरोप था कि इन क्षेत्रों में अपेक्षित विकास नहीं हुआ है और नेताओं ने जनता की समस्याओं के बजाय अपने विकास पर ज्यादा ध्यान दिया है। इन बयानों से फरेंदा के सामने मौजूद अलग-अलग अपेक्षाएं सामने आती हैं। जहां कुछ लोग सड़क और बुनियादी सुविधाओं में सुधार की बात कर रहे हैं, वहीं कुछ युवाओं के लिए उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार अधिक महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
2022 में सिर्फ 1,246 वोट से जीती थी कांग्रेस
फरेंदा विधानसभा सीट पर 2022 के चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी के बीच बेहद करीबी मुकाबला हुआ था। कांग्रेस के वीरेंद्र चौधरी ने बीजेपी के बजरंग बहादुर सिंह को 1,246 वोटों से हराया था।
चुनाव में उम्मीदवारों को मिले वोट इस प्रकार थे।
वीरेंद्र चौधरी, कांग्रेस: 85,181 वोट
बजरंग बहादुर सिंह, बीजेपी: 83,935 वोट
ईशू चौरसिया, बसपा: 21,665 वोट
सदा मोहन, सपा: 16,457 वोट
करीबी मुकाबले के कारण फरेंदा सीट पर स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों की छवि और मतदाताओं के रुख को विशेष महत्व दिया जा रहा है। हालांकि, 2022 के नतीजों के आधार पर 2027 के चुनाव का परिणाम तय नहीं माना जा सकता।
फरेंदा का राजनीतिक इतिहास और 2027 की चुनौती
महराजगंज जिले की फरेंदा विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2017 के चुनाव में बीजेपी के बजरंग बहादुर सिंह ने कांग्रेस के वीरेंद्र चौधरी को हराया था। वहीं, 2022 में वीरेंद्र चौधरी ने करीबी मुकाबले में जीत दर्ज की। इस सीट पर कांग्रेस, बीजेपी, सपा और बसपा की राजनीतिक सक्रियता के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे अहम बने हुए हैं। ब्राह्मण, ओबीसी, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं की भूमिका को भी चुनावी चर्चा में महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन अंतिम फैसला कई स्थानीय और राजनीतिक कारकों पर निर्भर करेगा।
फरेंदा का वोटर किसे देगा मौका?
TNP News की खास पेशकश ‘27 की सत्ता’ की ग्राउंड रिपोर्ट में एक तरफ राजनीतिक दल अपनी उपलब्धियां गिना रहे हैं, तो दूसरी तरफ स्थानीय लोग विकास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल उठा रहे हैं। क्या फरेंदा का वोटर विकास कार्यों को प्राथमिकता देगा? क्या शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मुद्दे चुनावी बहस की दिशा तय करेंगे? क्या 2022 की तरह कांग्रेस और बीजेपी के बीच करीबी मुकाबला देखने को मिलेगा, या सपा और बसपा भी अपनी स्थिति मजबूत करेंगी?
इन सवालों के जवाब अभी आने बाकी हैं। फिलहाल फरेंदा में सियासी दावों के बीच जनता के मुद्दे चर्चा में हैं। देखिए TNP News की खास पेशकश ‘27 की सत्ता’ में फरेंदा विधानसभा की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट और जानिए 2027 के चुनाव से पहले जनता के मन में क्या है और अलग-अलग राजनीतिक दलों के समर्थक क्या दावा कर रहे हैं।