यूपी चुनाव: यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सोशल मीडिया पर राजनीतिक प्रचार को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक रिपोर्ट में Meta की विज्ञापन लाइब्रेरी के आंकड़ों के हवाले से दावा किया गया है कि कुछ ऐसे पेज बीजेपी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं और विपक्षी नेताओं पर निशाना साध रहे हैं। खास बात यह है कि इन पेजों पर किसी राजनीतिक दल का नाम सीधे तौर पर नहीं लिखा है। इन पेजों ने करीब एक महीने में लगभग 15 लाख रुपये के विज्ञापन चलाए हैं। हालांकि, बीजेपी ने इन पेजों से किसी भी तरह का संबंध होने से साफ़ इनकार किया है।
15 लाख रुपये के विज्ञापनों से बढ़े सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक 4 अगस्त से 4 सितंबर के बीच उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को लक्षित करने वाले ऐसे पेजों के विज्ञापनों पर करीब 15 लाख रुपये खर्च हुए। इनमें बीजेपी और योगी सरकार की उपलब्धियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ अखिलेश यादव और कांग्रेस समेत विपक्ष पर निशाना साधने वाले विज्ञापन शामिल थे।
कौन-कौन से हैं ये ‘Invisible Campaigners’?
रिपोर्ट में तीन पेज प्रमुख रूप से सामने आए हैं।
Nonstop UP ने करीब 7.2 लाख रुपये के विज्ञापन चलाए। इसके विज्ञापनों में योगी सरकार की उपलब्धियों और यूपी में बीजेपी सरकार के कार्यकाल को बढ़ावा दिया गया।
Yaad Rakhega UP ने करीब 5.63 लाख रुपये खर्च किए। इस पेज से अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के खिलाफ करीब 200 विज्ञापन चलाए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
Bharat Todo Gang ने करीब 1.53 लाख रुपये खर्च किए। इसके विज्ञापनों में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत विपक्षी दलों को निशाना बनाया गया।
सबसे बड़ा सवाल- इन्हें चला कौन रहा है?
इन पेजों को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि इनके पीछे कौन है। रिपोर्ट के अनुसार इन पेजों पर किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं दिया गया है। Meta के राजनीतिक विज्ञापनों में भुगतान करने वाले की जानकारी देने का प्रावधान है, लेकिन इन मामलों में भुगतानकर्ता के तौर पर केवल संबंधित पेज का नाम दिखाई देता है।
रिपोर्ट के मुताबिक Nonstop UP और Yaad Rakhega UP से जुड़ी वेबसाइटों पर भी इनके संचालक या मालिक की स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती।
बीजेपी ने किया साफ इनकार
इस पूरे मामले में बीजेपी ने इन पेजों से दूरी बना ली है। बीजेपी के उत्तर प्रदेश सोशल मीडिया प्रमुख हिमांशु राज ने Nonstop UP, Yaad Rakhega UP और Bharat Todo Gang जैसे पेजों से पार्टी का संबंध होने से इनकार किया है। उनका कहना है कि कोई भी व्यक्ति किसी के नाम से तीसरा पक्ष वाला पेज बना सकता है और पार्टी ऐसे पेजों को नियंत्रित नहीं करती।
इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि इन विज्ञापनों के पीछे बीजेपी ही है। रिपोर्ट में भी इन पेजों को बीजेपी से जोड़ने वाला कोई प्रत्यक्ष दस्तावेज सामने नहीं आया है।
2027 चुनाव से पहले सोशल मीडिया पर बढ़ी जंग
इस मामले ने यूपी की चुनावी राजनीति में सोशल मीडिया प्रचार और राजनीतिक विज्ञापनों को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। खासकर तब, जब 2027 विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं और औपचारिक चुनाव प्रचार शुरू नहीं हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक इसी अवधि में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस से जुड़े आधिकारिक पेजों का विज्ञापन खर्च इन पेजों की तुलना में बेहद कम रहा। हालांकि यह आंकड़ा केवल एक महीने की अवधि का है और इससे पूरे चुनावी अभियान का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
विपक्ष ने भी लगाए गंभीर आरोप
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता नावेद सिद्दीकी ने इन पेजों को बीजेपी के लिए काम करने वाला सरोगेट प्रचार तंत्र बताया है। हालांकि यह विपक्ष का आरोप है और बीजेपी इससे साफ तौर पर इनकार कर रही है। ऐसे में फिलहाल इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि इन गुमनाम पेजों के पीछे आखिर पैसा और संचालन किसका है।
यह भी पढ़ें: NH-48 का जाम होगा कम! गुरुग्राम से रेवाड़ी 45 मिनट में पहुंचने की उम्मीद, नया हाईवे देगा तेज कनेक्टिविटी