Hindi Diwas 2026: 14 सितंबर 2026 को भारत में हिंदी दिवस मनाया जा रहा है। स्कूल से लेकर बड़े-बड़े कार्यालयों में लोग जहां काम-काज में हिंदी का इस्तेमाल कर आम बोलचाल की भाषा में भी हिंदी को प्राथमिकता दे रहे हैं। तो वहीं अब विदेशी नागरिकों का भी हिंदी बोलने और सिखने की तरफ रूझान बढ़ रहा है। बीते दिनों भारत ने 18वें ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी की थी। इसमें विदेशों से भी जाने माने चेहरों ने शिरकत की। ऐसे में आज इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने 14 सितंबर को हिंदी दिवस के पर बधाई दी है.

नमस्ते भारत मेरा नाम रूवेन अजार है

हिंदी दिवस के खास मौके पर उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो संदेश पोस्ट किया है। जिसकी शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा- ''नमस्ते भारत मेरा नाम रूवेन अजार है''। मैं भारत में इजरायल का राजदूत हूं,मैं जब 2 वर्ष पहले भारत आया था उस दौरान मैने हिंदी सीखने की शुरुआत की थी। आज 2 साल बाद मैं आप सबको हिंदी दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं देना चाहता हूं।

 

आज मनाया जाता है हिंदी दिवस

इस वीडियो के कैप्शन पर उन्होंने लिखा है कि 2 पुरानी भाषाएं हैं,जो आज भी ज़िंदा हैं। हिंदी दिवस के अवसर पर इजरायल सभी को हार्दिक शुभकमनाएं देता है। हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। यह दिन हिंदी भाषा के महत्व को समझाने और इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। देश में सरकारी कामकाज,शिक्षा और कई अन्य क्षेत्रों में हिंदी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए जगह-जगह कार्यक्रमों का आयोजन होता है।

क्यों मनाते हैं हिंदी दिवस?

हिंदी दिवस मनाए जाने के पीछे की असली वजह देश के संविधान से जुड़ी है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में ने हिंदी को देवनागरी लिपि में संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकृति मिली थी। इस ऐतिहासिक फैसले की याद में हर वर्ष यानी 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। हिंदी को राजभाषा के तौर पर अपनाने के बाद अब इसका इस्तेमाल सरकारी कामकाज में बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। समय के साथ हिंदी का प्रयोग प्रशासन के साथ-साथ शिक्षा, साहित्य, मीडिया और जनसंचार के कई क्षेत्रों में भी बढ़ा है।

हिंदी को लेकर संविधान में क्या कहा गया?

हिंदी को लेकर अगर बात की जाए तो अक्सर लोगों में असमंजस बना रहता है कि, संविधान के अनुच्छेद 343 में हिंदी को देवनागरी लिपि में संघ की राजभाषा बताया गया। इसका सीधा अर्थ हिंदी को संविधान में भारत की राष्ट्रीय भाषा नहीं कहा गया। भारत की भाषाई विविधता को देखते हुए संविधान में हिंदी के साथ दूसरी भाषाओं के लिए भी अलग-अलग प्रावधान रखे गए हैं।


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