ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियों को लेकर बड़ा बयान दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने दावा किया है कि नौसैनिक नाकाबंदी दोबारा लागू होने के बाद से कोई भी जहाज अमेरिका की मंजूरी के बिना ईरान के बंदरगाहों तक नहीं पहुंच सका और न ही वहां से बाहर निकल पाया।

1,500 व्यापारिक जहाजों को मिली सुरक्षा

एडमिरल कूपर के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी नौसेना ने करीब 1,500 वाणिज्यिक जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने में सहायता दी है। इन जहाजों में लगभग 75 करोड़ बैरल कच्चा तेल मौजूद था, जो वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए बेहद अहम माना जाता है, उन्होंने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग निर्धारित हैं, जहां दोनों दिशाओं में जाने वाले जहाजों को अलग-अलग रास्तों से संचालित किया जाता है ताकि समुद्री यातायात सुरक्षित बना रहे।

खाड़ी क्षेत्र में 50 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात

CENTCOM कमांडर ने कहा कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में करीब 50 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ये सैनिक ईरान के खिलाफ लागू नौसैनिक प्रतिबंधों को बनाए रखने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को सुचारू रखने में भी भूमिका निभा रहे हैं। कूपर के मुताबिक, अमेरिकी सेना का लक्ष्य केवल दबाव बनाए रखना नहीं बल्कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना भी है।

होर्मुज से समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने का दावा

अमेरिकी कमांडर ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी बलों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट से समुद्री बारूदी सुरंगों को हटा दिया है, उन्होंने आरोप लगाया कि ये सुरंगें कुछ महीने पहले ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से बिछाई गई थीं। कूपर ने कहा कि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त समुद्री मार्ग इन सुरंगों से मुक्त हैं और यह अमेरिकी सैनिकों की बड़ी उपलब्धि है।

20 से ज्यादा युद्धपोत और सैकड़ों विमान तैनात

अमेरिकी CENTCOM प्रमुख ने बताया कि इस अभियान में हजारों सैनिकों के साथ 20 से अधिक युद्धपोत और सैकड़ों सैन्य विमान शामिल हैं, उनके अनुसार, नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश करने वाले करीब 75 जहाजों को वापस भेजा गया, जबकि नियमों का पालन नहीं करने वाले तीन जहाजों को निष्क्रिय कर दिया गया।  एडमिरल कूपर ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने एक तरफ ईरान पर लागू नौसैनिक नाकाबंदी को प्रभावी बनाए रखा है, वहीं दूसरी ओर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की आवाजाही को भी जारी रखा है।