बर्धमान: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित कार्रवाई और गिरफ्तारियों के विरोध में पश्चिम बंगाल के बर्धमान में गांधीवादी पदयात्रा में शामिल लोगों ने आवाज बुलंद की। पदयात्रियों ने शांतिपूर्ण आंदोलन को नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए संविधान और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा की मांग की।
गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को कोलकाता के बेलेघाटा स्थित गांधी भवन से शुरू हुई ‘जहां पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा अपने नौवें दिन कलानबग्राम के शिक्षा-निकेतन से आगे बढ़कर बर्धमान पहुंची। सर्व सेवा संघ और अन्य लोकतांत्रिक संगठनों के संयुक्त आयोजन में निकाली जा रही यह यात्रा प्रेम, शांति, अहिंसा, सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मूल्यों का संदेश दे रही है। आयोजकों के मुताबिक, देश के करीब 15 राज्यों से आए पदयात्री इसमें शामिल हैं। यात्रा 16 अक्टूबर को शांतिनिकेतन पहुंचेगी।
जंतर-मंतर पर कार्रवाई को लेकर जताई चिंता
पदयात्रा में शामिल लोगों ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव प्रक्रिया को संविधान के अनुरूप बनाने की मांग को लेकर हुए आंदोलन के दौरान की गई कार्रवाई पर चिंता जताई। पदयात्रियों ने प्रदर्शनकारियों की कथित गिरफ्तारियों और दमनात्मक कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने का अधिकार है।
पदयात्रियों ने कहा कि असहमति की आवाज को दबाने के बजाय उसे सुना जाना चाहिए। उन्होंने देश में लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक अधिकारों और संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा पर जोर दिया। इस कार्रवाई को लेकर यात्रा में शामिल लोगों ने दुख और आक्रोश व्यक्त किया तथा सच्चाई और लोकतंत्र की जीत की उम्मीद जताई।
सर्वधर्म प्रार्थना के साथ शुरू हुई पदयात्रा
यात्रा के नौवें दिन की शुरुआत सुबह सात बजे कलानबग्राम के चौक पर सर्वधर्म प्रार्थना के साथ हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण भी मौजूद रहे। ग्रामीणों के बीच पदयात्रा के उद्देश्य और संदेश से संबंधित पर्चे वितरित किए गए।
प्रार्थना के बाद पदयात्री नारों और जनगीतों के साथ बर्धमान की ओर रवाना हुए। कोलकाता से आए बिप्लब नायक रास्ते भर लोगों को यात्रा के उद्देश्य और गांधीवादी विचारों के बारे में बताते रहे। तेज धूप और कठिन परिस्थितियों के बावजूद पदयात्रियों का उत्साह बना रहा। रास्ते में बंगाल के कई युवा भी यात्रा से जुड़े और गीतों के माध्यम से लोगों तक शांति और सद्भाव का संदेश पहुंचाया।
कर्जन गेट पर नुक्कड़ सभा, जनगीतों के जरिए दिया प्रेम का संदेश
दोपहर करीब एक बजे पदयात्रा बर्धमान के ऐतिहासिक कर्जन गेट से गुजरते हुए बाजार क्षेत्र में पहुंची, जहां दोपहर का पड़ाव हुआ। शाम को कर्जन गेट के पास नुक्कड़ सभा आयोजित की गई। इस दौरान पदयात्रियों ने बाजार में मार्च किया और स्थानीय लोगों के बीच पर्चे बांटकर यात्रा के उद्देश्यों को साझा किया।
सभा में बिप्लब नायक ने पदयात्रा की पृष्ठभूमि, उसके उद्देश्यों और मौजूदा समय में गांधीवादी मूल्यों की प्रासंगिकता पर बात रखी। मध्य प्रदेश के शहडोल से आए इस्तियाक भाई और राजस्थान से आए जगदीश कुमार ने सांस्कृतिक गीत प्रस्तुत किए।
वहीं, सुंदरबन से आए प्रदीप सरदार और चितरंजन प्रमाणिक ने जनगीतों के माध्यम से प्रेम, शांति, एकजुटता और सामाजिक बदलाव का संदेश दिया।
पदयात्रा के माध्यम से प्रतिभागियों ने अहिंसा, आपसी सद्भाव और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का आह्वान किया। अब यह यात्रा अपने अगले पड़ाव शांतिनिकेतन की ओर बढ़ेगी।