नई दिल्ली: 10 अक्टूबर शनिवार को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर सुरक्षा व्यवस्था की गई। चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में लगभग लॉकडाउन जैसी स्थिति बन गई। अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, पिनाराई विजयन, नेहा बोरा, योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण समेत कई विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया। शाम तक राजधानी में करीब 6,000 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका था और किसी भी प्रदर्शनकारी को जंतर-मंतर तक नहीं पहुंचने दिया गया।

हिरासत में लिए गए लोगों को नहीं छोड़ने पर करेंगे उपवास

वहीं इस संदर्भ में पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा कि अगर हिरासत में लिए गए लोगों को रविवार तक रिहा नहीं किया गया, तो उन्हें उपवास या पदयात्रा शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। शाम को नेहा बोरा और अन्य लोगों को मैदान गढ़ी पुलिस स्टेशन से रिहा कर दिया गया। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करना था। यह मांग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर उठाई गई।

दिल्ली हाट में फिर से इकट्ठा होने की अपील की

जंतर-मंतर को सील किए जाने के बाद, कार्यकर्ताओं ने समर्थकों से दिल्ली हाट में फिर से इकट्ठा होने की अपील की। ​​बोरा, यादव और भूषण को हिरासत में ले लिया गया। बनर्जी और तृणमूल के अन्य नेताओं को उनके दिल्ली स्थित आवास के बाहर एवं केजरीवाल और AAP के सौरभ भारद्वाज को जंतर-मंतर के पास हिरासत में लिया गया। वहीं हिरासत के बाद विजयन को छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक जारी रहेगा प्रदर्शन

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को दिल्ली में विमान के उतरने पर हिरासत में ले लिया गया। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने के लिए चुने गए CJP के अजिंक्य शिंदे ने कहा कि यह प्रदर्शन "ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक" जारी रहेगा।