Panjab University Election: चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। ABVP के उम्मीदवार अंकित बिढान ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल कर ली है। जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन के बाद हुए इस छात्र संघ चुनाव पर पंजाब की राजनीति के साथ-साथ युवाओं और Gen Z मतदाताओं के रुख को लेकर भी खास नजर थी। चुनाव प्रचार के दौरान जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। विपक्षी छात्र संगठनों ने लगातार इस मुद्दे को उठाते हुए ABVP को घेरने की कोशिश की। हालांकि, तमाम राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच ABVP उम्मीदवार अंकित बिढान ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर संगठन को बड़ी सफलता दिलाई।
पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के Gen Z छात्रों का अहम रोल
पंजाब यूनिवर्सिटी में पंजाब के साथ-साथ हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से भी बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई करते हैं। ऐसे में छात्र संघ चुनाव को केवल कैंपस की राजनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा है। खासकर युवा और Gen Z मतदाताओं के रुझान को समझने के लिए इस चुनाव के नतीजे अहम माने जा रहे हैं। जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद यह पहला बड़ा छात्र संघ चुनाव था, इसलिए राजनीतिक और छात्र संगठनों की नजर इस बात पर थी कि युवा मतदाता किस मुद्दे और विचारधारा को समर्थन देते हैं। अध्यक्ष पद पर ABVP की जीत को इसी संदर्भ में संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
2027 का 'सेमीफाइनल' क्यों कहा जा रहा है?
बता दें कि पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव को वर्ष 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले एक तरह का राजनीतिक संकेतक भी माना जा रहा है। यूनिवर्सिटी में पंजाब के सभी 23 जिलों से बड़ी संख्या में युवा पढ़ाई करते हैं। ऐसे में कैंपस का चुनावी माहौल इस बात का संकेत देता है कि पढ़ा-लिखा और जागरूक युवा वर्ग किन मुद्दों और राजनीतिक विचारों की ओर झुक रहा है। राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां भी छात्र राजनीति के जरिए युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं। माना जा रहा है कि यहां से उभरने वाले कई युवा नेता 2027 के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के ग्राउंड कैंपेन का अहम चेहरा बन सकते हैं।
लोकल मुद्दों ने बदला चुनाव का गणित
इस बार छात्र चुनाव में हॉस्टल की बुनियादी सुविधाएं, फीस वृद्धि, रिसर्च स्कॉलर्स से जुड़े मुद्दे और कैंपस सुरक्षा जैसे स्थानीय विषय प्रमुख रहे। कई मामलों में छात्रों के लिए ये मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति से ज्यादा अहम दिखाई दिए। निर्दलीय उम्मीदवारों और विभिन्न बागी छात्र गुटों की मौजूदगी ने भी चुनावी मुकाबले को रोचक बना दिया था और बड़े संगठनों का गणित उलझा दिया। अब छात्र संघ अध्यक्ष का ताज ABVP के अंकित बिढान के सिर सज चुका है। इस जीत के बाद पंजाब की छात्र राजनीति में ABVP को बड़ी मजबूती मिली है। साथ ही, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में युवाओं के बदलते रुझान को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।