मुंबई: महाराष्ट्र में कृष्ण जन्माष्टमी के उत्सव के बीच दही हांडी की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं। इसी कड़ी में लाल साड़ियों में सजी युवतियों ने मानव पिरामिड बनाकर न केवल अपनी शारीरिक क्षमता और टीमवर्क का प्रदर्शन किया, बल्कि महिला सशक्तिकरण और समानता का मजबूत संदेश भी दिया।
ये युवतियां निर्भया महिला गोविंदा पथक की सदस्य हैं। टीम में करीब 60 छात्राएं शामिल हैं, जो पिछले लगभग एक महीने से दही हांडी के लिए अभ्यास कर रही हैं। इस वर्ष टीम ने पारंपरिक लक्ष्मी से प्रेरित रूप अपनाया है, जिसका उद्देश्य महिलाओं की ताकत, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित करना है।
सुरक्षा का भी रखा जा रहा खास ध्यान
प्रशिक्षण के दौरान सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। मानव पिरामिड के सबसे ऊपर चढ़ने वाली प्रतिभागी को सुरक्षात्मक हेडगियर दिया जाता है। इसके अलावा संतुलन बनाए रखने और एक-दूसरे को सहारा देने के लिए बेल्ट और तौलिये का इस्तेमाल किया जाता है।
टीम के मुख्य प्रशिक्षक महेश नवले ने कहा कि उनका उद्देश्य दही हांडी की पारंपरिक भावना को कायम रखते हुए समाज में सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना है।
उन्होंने कहा कि दही हांडी के पारंपरिक स्वरूप को आगे बढ़ाना जरूरी है, लेकिन इसे सुरक्षित तरीके से करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
‘लड़कियां किसी से कम नहीं’
टीम की सदस्य माधुरी वर्मा ने बताया कि सभी प्रतिभागी नियमित रूप से अभ्यास कर रही हैं और यह दिखाना चाहती हैं कि लड़कियां उन चुनौतियों को भी पूरा कर सकती हैं जिन्हें पारंपरिक रूप से पुरुषों से जोड़ा जाता रहा है।
उन्होंने कहा, “लड़कियां किसी से कम नहीं हैं। लड़कियां अपने दम पर सब कुछ कर सकती हैं।”
वहीं, टीम की एक अन्य सदस्य साक्षी यादव ने बताया कि इस साल का पूरा पहनावा और प्रदर्शन महिला सशक्तिकरण के संदेश पर आधारित है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को डरकर नहीं जीना चाहिए और उन्हें बिना किसी भय के आगे बढ़ना चाहिए।
साक्षी ने बताया कि अभ्यास के दौरान प्रतिभागी एक-दूसरे की मदद भी करती हैं। किसी को पैर रखने की सही जगह, बेल्ट पकड़ने या संतुलन बनाने में परेशानी होने पर बाकी लड़कियां उसे समझाती और सहारा देती हैं।
दही हांडी की परंपरा और कृष्ण जन्माष्टमी
दही हांडी महाराष्ट्र के प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है। इसमें दही, मक्खन और अन्य दुग्ध उत्पादों से भरी मिट्टी की हांडी को ऊंचाई पर लटकाया जाता है। इसके बाद गोविंदा मानव पिरामिड बनाकर ऊपर पहुंचते हैं और हांडी फोड़ते हैं।
यह परंपरा भगवान कृष्ण के बचपन की उन कथाओं से जुड़ी है, जिनमें वे ऊंचाई पर लटकाए गए दही और मक्खन को पाने के लिए अपने साथियों के साथ प्रयास करते थे।
जन्माष्टमी के अवसर पर देशभर में भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना के साथ झूले, संगीत, नृत्य और दही हांडी जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। महाराष्ट्र में दही हांडी उत्सव विशेष रूप से लोकप्रिय है।
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