शेयर बाजार में मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को कुछ चुनिंदा शेयरों में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह MSCI Index Rebalancing है। MSCI में किए गए बदलाव 1 सितंबर से लागू हो रहे हैं, जिसके चलते वैश्विक फंडों को अपने पोर्टफोलियो में खरीद-बिक्री करनी होगी। ऐसे में कुछ शेयरों में भारी खरीदारी तो कुछ में बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है।

इन 4 शेयरों की होगी एंट्री
MSCI India Standard Index में चार भारतीय कंपनियों को शामिल किया गया है। इनमें Laurus Labs, Lenskart Solutions, Adani Energy Solutions और Billionbrains Garage Ventures शामिल हैं। Billionbrains Garage Ventures ही Groww की पैरेंट कंपनी है।

इन कंपनियों के शेयरों में MSCI से जुड़े पैसिव फंड्स की खरीदारी के कारण मांग बढ़ने की उम्मीद है। अनुमान के मुताबिक Laurus Labs में करीब 598 मिलियन डॉलर, Lenskart में 352 मिलियन डॉलर, Adani Energy Solutions में 310 मिलियन डॉलर और Groww की पैरेंट कंपनी में करीब 256 मिलियन डॉलर के संभावित पैसिव इनफ्लो का अनुमान लगाया गया है।

इन 3 शेयरों को MSCI से बाहर किया गया
MSCI India Standard Index से Balkrishna Industries, SBI Cards and Payment Services और Astral को बाहर किया जा रहा है। ऐसे में इन शेयरों में पैसिव फंड्स की बिकवाली देखने को मिल सकती है। अनुमानों के मुताबिक Balkrishna Industries में करीब 169 मिलियन डॉलर, SBI Cards में 143 मिलियन डॉलर और Astral में 138 मिलियन डॉलर तक के संभावित आउटफ्लो का अनुमान लगाया गया है।

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Reliance और Adani Enterprises पर भी नजर
MSCI ने कुछ पहले से शामिल कंपनियों के वेटेज में भी बदलाव किया है। Reliance Industries का MSCI वेटेज घटाया गया है, जबकि Adani Enterprises का वेटेज बढ़ाया गया है। इससे दोनों शेयरों में फंड फ्लो के कारण हलचल देखने को मिल सकती है। अनुमान के मुताबिक Reliance Industries से करीब 523 मिलियन डॉलर का संभावित आउटफ्लो, जबकि Adani Enterprises में करीब 202 मिलियन डॉलर का इनफ्लो हो सकता है।

बाजार में क्यों बढ़ सकता है उतार-चढ़ाव?
MSCI Rebalancing के कारण बड़े संस्थागत निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करना पड़ता है। खासकर कम लिक्विडिटी वाले शेयरों में बड़ी खरीद या बिकवाली से कीमतों में अचानक तेज बदलाव आ सकता है। इसके अलावा भारत में हाल ही में शुरू किए गए Closing Auction Session (CAS) के लिए भी यह एक बड़ा टेस्ट होगा। MSCI Rebalancing के दौरान बड़ी मात्रा में ऑर्डर अंतिम चरण में आने की संभावना है, जिससे कुछ शेयरों में वोलैटिलिटी बढ़ सकती है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?
MSCI में किसी शेयर के शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि उसके भाव निश्चित रूप से बढ़ेंगे। इसी तरह किसी शेयर के इंडेक्स से बाहर होने का मतलब यह भी नहीं है कि शेयर जरूर गिरेगा। बाजार में ग्लोबल संकेत, कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेश और कंपनी से जुड़ी खबरें भी असर डालती हैं। इसलिए निवेशकों को केवल MSCI बदलाव देखकर जल्दबाजी में खरीद-बिक्री करने के बजाय अपनी रिसर्च और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए।