महाराष्ट्र के जालना जिले के अंतरवाली सराटी में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे मनोज जरांगे पाटील की तबीयत तीसरे दिन खराब होने की खबर सामने आई है। सोमवार, 31 अगस्त की रात स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम उनकी जांच के लिए उपोषण स्थल पर पहुंची थी, लेकिन जरांगे पाटील ने चिकित्सकीय जांच कराने से मना कर दिया। इसके बाद टीम को बिना जांच किए ही वापस लौटना पड़ा, लगातार उपवास के चलते उनके ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर में कमी दर्ज किए जाने की जानकारी है। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को देखते हुए चिकित्सकीय उपचार की जरूरत बताई है। मेडिकल अधिकारियों ने जरांगे पाटील की स्वास्थ्य स्थिति से वरिष्ठ अधिकारियों को भी अवगत कराया है। इससे पहले भी स्वास्थ्य विभाग की टीम उनकी जांच कर चुकी है। उस दौरान सामने आई रिपोर्ट में स्वास्थ्य में बदलाव दर्ज किया गया था। इसके बाद प्रशासन ने मेडिकल टीम को उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने के निर्देश दिए थे।

क्या हैं मनोज जरांगे पाटील की प्रमुख मांगें?

मनोज जरांगे पाटील ने 29 अगस्त से अंतरवाली सराटी में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया है। यह उनका 11वां उपवास बताया जा रहा है, उनकी प्रमुख मांगों में मराठा समाज के लोगों को कुनबी प्रमाणपत्र जारी करना, ‘सगे-सोयरे’ अधिसूचना को लागू करना और मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी तथा आर्थिक सहायता देना शामिल है।

समर्थकों से मुंबई पहुंचने की अपील

अनशन के तीसरे दिन जरांगे पाटील ने अपने समर्थकों से मुंबई पहुंचने का आह्वान किया। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में मराठा समाज के लोग मुंबई का रुख कर सकते हैं। इसके लिए उन्होंने समर्थकों के मुंबई पहुंचने की चरणबद्ध रणनीति भी बताई है।

वैध मांगों पर चर्चा के लिए तैयार- सरकार बोली

मराठा आरक्षण के मुद्दे पर राज्य सरकार की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार उन मांगों पर बातचीत के लिए तैयार है, जो संवैधानिक और कानूनी दायरे में आती हैं। वहीं, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि सरकार मराठा समाज को आरक्षण देने के पक्ष में है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे अन्य समुदायों को मिलने वाले आरक्षण पर असर न पड़े। फिलहाल जरांगे पाटील की स्वास्थ्य स्थिति प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। मेडिकल टीम द्वारा उपचार की जरूरत बताए जाने के बावजूद उनके जांच से इनकार करने के बाद उपोषण स्थल पर मौजूद समर्थकों और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

 

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