बिहार में कानून की रक्षा करने वालों पर ही अब कानून तोड़ने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। मधुबनी में एक ASI ने ऐसा ही खौफनाक कदम उठाया, जिसमें एक व्यक्ति की जान चली गई और तीन अन्य लोग घायल हो गए। हैरानी की बात यह है कि जिस पिस्टल का इस्तेमाल लोगों की सुरक्षा के लिए होना चाहिए था, उसी सरकारी हथियार से ग्रामीणों पर गोलियां बरसाई गई।
घटना मधुबनी जिले के बाबूबरही थाना क्षेत्र के बलिराजगढ़ गांव की है। आरोप है कि सोमवार, 2 नवंबर की रात एक ASI गांव में एक महिला से मिलने पहुंचा था। बताया जा रहा है कि उस महिला के साथ उसके निजी संबंध थे। इसी दौरान कुछ ग्रामीणों की नजर उस पर पड़ गई। ग्रामीणों ने उसे वहां से बाहर आने को कहा, लेकिन मामला शांत होने के बजाय हिंसक हो गया। आरोप है कि पकड़े जाने के डर से ASI ने अपनी सरकारी पिस्टल निकाल ली और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों की आवाज से पूरा गांव दहल उठा। इस दौरान चार लोगों को गोली लगी। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।
एक परिवार में मातम
फायरिंग में घायल चारों लोगों को स्थानीय पुलिस की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान 50 वर्षीय अशोक यादव की मौत हो गई। बाकी तीन घायलों का इलाज चल रहा है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस की डायल-112 टीम मौके पर पहुंची। गांव में तनाव और गुस्से का माहौल है। लोग आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
SSP ने की घटना की पुष्टि
मधुबनी के एसएसपी योगेंद्र कुमार ने घटना की पुष्टि की है, उनके मुताबिक, गोली लगने से एक व्यक्ति की मौत हुई है, जबकि तीन लोग घायल हैं। मामले की जांच की जा रही है और आरोपी ASI को निलंबित कर दिया गया है। हालांकि, सिर्फ निलंबन से क्या एक परिवार को इंसाफ मिल जाएगा? सरकारी हथियार का इस्तेमाल करके किसी की जान चली जाए तो क्या विभागीय कार्रवाई ही काफी है? ऐसे मामलों में आपराधिक जिम्मेदारी तय करना भी उतना ही जरूरी है।
बाबूबरही थाना क्षेत्र के बलिराजगढ़ गांव में पुलिसकर्मी द्वारा अपने सर्विस पिस्टल से गोली चलाने की घटित घटना के संदर्भ में अद्यतन प्रतिवेदनः- #HainTaiyaarHum #BiharPolice #Bihar @DmMadhubani @bihar_police @BiharHomeDept @IPRDBihar https://t.co/wTSp9hbXqc
— Madhubani Police (@MadhubaniPol) November 3, 2026
बिहार में पुलिसकर्मियों की ऐसी हरकतों पर लगाम क्यों नहीं?
मधुबनी की यह घटना केवल एक पुलिसकर्मी की निजी जिंदगी या गुस्से का मामला नहीं है। यह पुलिस विभाग की निगरानी, हथियारों के इस्तेमाल और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करती है। जब किसी आम नागरिक के हाथ में हथियार होता है तो कानून उससे जवाब मांगता है। फिर वर्दी पहनने वाले व्यक्ति के लिए अलग पैमाना क्यों होना चाहिए? सरकारी पिस्टल किसी पुलिसकर्मी की निजी ताकत नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी है।
बिहार में पुलिस से जुड़े ऐसे मामलों की चर्चा के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या पुलिसकर्मियों के व्यवहार और कामकाज की निगरानी पर्याप्त है? क्या हथियारों के इस्तेमाल के नियमों का नियमित पालन कराया जा रहा है? क्या थानों और पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का मजबूत सिस्टम है? सरकार की जिम्मेदारी सिर्फ अपराध होने के बाद आरोपी को सस्पेंड करने तक सीमित नहीं हो सकती। पुलिसकर्मियों की नियमित ट्रेनिंग, मानसिक दबाव की पहचान, हथियारों के इस्तेमाल की निगरानी, शिकायतों पर निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा दिलाने की व्यवस्था भी जरूरी है।
बता दें कि बिहार में ऐसी घटनाएं निश्चित रूप से बढ़ रही हैं। वहीं मधुबनी की घटना ने एक बार फिर पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कानून का राज तभी मजबूत होगा, जब कानून लागू करने वाले भी उसके दायरे में रहेंगे। वर्दी किसी को मनमानी करने का अधिकार नहीं देती।
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