सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर कर न्यायपालिका पर सवाल खड़े किए, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जज कानून के हिसाब से काम करने और सरकार की मनमानी पर रोक लगाने के बजाय अपनी निजी सोच के आधार पर फैसले सुनाते हैं। दास ने अपनी पोस्ट में कहा कि देश में ऐसे जज भी हैं, जो संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाने के बजाय अपने विचारों और धारणाओं को फैसलों में जगह देते हैं, उन्होंने इसे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि संविधान का अपमान करने वालों को इसकी कीमत चुकानी होगी।

सौरव दास के खिलाफ हाई कोर्ट में पहुंची PIL

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब मद्रास हाई कोर्ट में सौरव दास को लेकर एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, एक्स और इंस्टाग्राम से जवाब मांगा है। याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय से सौरव दास और उनके परिवार के सदस्यों की पृष्ठभूमि की जांच कराने की मांग की गई है। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने उनका पासपोर्ट और आधार कार्ड रद्द करने की मांग भी उठाई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि संबंधित मंत्रालय सोशल मीडिया पर उनके अकाउंट को ब्लॉक करने के निर्देश दें, ताकि वह न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां न कर सकें।

किसने दाखिल की है याचिका?

यह PIL कांचीपुरम के कारोबारी आर. गणेश कुमार ने दाखिल की है। याचिका में सौरव दास के साथ अभिजीत दीपके, नेहा बोरा और कुछ अन्य लोगों के आपसी संबंधों और उनके एक साथ आने के पीछे की वजहों की जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने इन लोगों की अलग-अलग पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए सवाल उठाया है कि आखिर ये सभी एक साथ कैसे जुड़े। याचिका में किसी को फ्रीलांस कानूनी पत्रकार, किसी को कॉलेज छात्र संघ में कम्युनिस्ट पार्टी का पदाधिकारी और किसी को अमेरिका से लौटा हुआ व्यक्ति बताया गया है।

हाई कोर्ट ने छह हफ्ते में मांगा जवाब

मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने केंद्र के मंत्रालयों, एक्स, मेटा प्लेटफॉर्म्स, सौरव दास और उनके परिवार के सदस्यों को छह सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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सौरव दास की पृष्ठभूमि को लेकर भी उठाए सवाल

याचिकाकर्ता आर. गणेश कुमार ने सौरव दास की पारिवारिक और मूल पृष्ठभूमि की जांच कराने की मांग की है। उनका दावा है कि दास की जड़ें नेपाल से जुड़ी हो सकती हैं और इसकी पड़ताल होनी चाहिए। हालांकि, यह याचिकाकर्ता का आरोप है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि सौरव दास ने न्यायपालिका और खासतौर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली टिप्पणियां की हैं। याचिकाकर्ता ने इस मामले में उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग भी की है।