Flight Ticket Price Hike: देश में इस समय त्योहारों का सीजन शुरू हो चुका है। लोग अपने-अपने घर जाने के लिए किसी ना किसी साधन को अपना रहे हैं। कोई बस से सफर कर रहा है, तो कोई ट्रेन से सफर कर रहा है। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें समय पर छुट्टी नहीं मिलती और दिन के दिन ही घर जाते हैं वह ज्यादातर हवाई सफर ही करते हैं। लेकिन जरा ठहरिए क्योंकि यह खबर आपकी जेब पर आए असर को उजागर करने वाली है।
बता दें कि बीते दिनों हवाई किराए में 700 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने के बाद आम नागरिक का बजट गड़बड़ाने वाला है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से अर्जी पर सुनवाई की। इसपर पीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा, "हवाई यात्रा न करें," और तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। दरअसल कोर्ट में पहले से ही हवाई किराए में मनमाने ढंग से वृद्धि और पारदर्शिता को लेकर दायर एक अन्य जनहित याचिका (PIL) पर विचार किया जा रहा है। इसकी अगली सुनवाई तय तारीख पर होगी।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
यह मामला सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ के सामने आया, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह शामिल थे। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि विमान किराए में करीब 700 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने दलील दी कि हवाई यात्रा एक आवश्यक सेवा है और किराए में इतनी अधिक वृद्धि संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। हालांकि, अदालत ने मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। वकील ने दलील देते हुए किराए की वृद्धि पर कही यह बात।
यात्रियों के लिए क्या है इसका मतलब?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने हवाई टिकटों के किराए की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की है और न ही एयरलाइंस को तत्काल किराया घटाने का आदेश दिया है। इसलिए यात्रियों को टिकट बुक करने से पहले अलग-अलग एयरलाइंस के किराए की तुलना करनी चाहिए।
16 नवंबर को फिर होगी सुनवाई
इस मामले में एक महत्वपूर्ण तारीख 16 नवंबर 2026 है। सुप्रीम कोर्ट में हवाई किराए को नियंत्रित करने की मांग वाली मुख्य जनहित याचिका पर इसी दिन सुनवाई होनी है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत नए नियम अधिसूचित किए हैं, जो 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। असाधारण परिस्थितियों में जनहित को देखते हुए सरकार को हवाई किराए में हस्तक्षेप करने का अधिकार मिलेगा। त्योहार के समय में हवाई यात्रा की कीमतों में तेजी से बढ़ौतरी के खिलाफ एक याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत लिस्ट करने से साफ इनकार कर दिया है।
कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी
दरअसल याचिकाकरता ने त्योहारों के समय घरेलू हवाई यात्रा के दौरान किराया तय करने के लिए एक सिस्टम बनाने की मांग की थी। हवाई किराए के रेगुलेशन के मामले में अभी भी SC के सामने पहले से एक केस पेंडिंग चल रहा है। याचिका पर सुनवाई कर रही बेंच को कोर्ट से दखल देने की मांग करते हुए बताया गया। लेकिन कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। एक वकील ने जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ के समक्ष याचिका की तत्काल सुनवाई की मांग की थी। वकील ने दलील दी कि हवाई किराए में 700% तक की भारी बढ़ोतरी हुई है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) का उल्लंघन है।
वकील ने क्या कुछ कहा?
याचिकाकर्ता के वकील अभिनव ने कहा कि किराए में 700% की बढ़ोतरी संविधान के आर्टिकल 14 का उल्लंघन है। बेंच ने सीधे तौर पर कहा है कि हवाई यात्रा न करें। केंद्र ने पहले सुप्रीम कोर्ट को कहा था कि भारतीय वायुयान अधिनियम 2024 के तहत हवाई किराए के नियम 2 हफ़्ते में पब्लिश किए जाएंगे। लेकिन बढ़ौतरी को लेकर पेंडिंग PIL में फाइल की गई एप्लीकेशन में अगली सुनवाई 16 नवंबर को तय की है। दीवाली, भाई दूज और छठ पूजा के लिए त्योहारों पर जाना खत्म हो जाएगा। इसलिए कोर्ट से इसे लेकर जल्द से जल्द सुनवाई करने की अपील भी की जा रही है।
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मनमाने दाम
सोशल एक्टिविस्ट S.लक्ष्मीनारायणन ने बीते वर्ष कोर्ट में याचिका दायर कर त्योहारों के मौसम में एयरलाइंस की मनमानी और कीमतों में तेजी को लेकर राज्य सरकार के कुछ न करने पर सवाल उठाया था। इसी वर्ष जनवरी में इसकी सुनवाई करते हुए जस्टिस नाथ ने इसे 'शोषण' कहा था। उन्होंने कहा, हम ज़रूर दखल देंगे। कुंभ और दूसरे त्योहारों के दौरान होने वाले शोषण को देखिए। दिल्ली से प्रयागराज और जोधपुर का किराया देखिए-नॉर्मल से तीन गुना ज़्यादा। 15 मई को इस पर फिर से सुनवाई करते हुए जस्टिस नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सरकार से कहा, 'कुछ रैशनलाइज़ेशन होना चाहिए।
'तत्काल राहत' की आवश्यकता
केंद्र और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार नए भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत नियम बनाने की प्रक्रिया में है। लेकिन अदालत ने 'तत्काल राहत' की आवश्यकता पर बल दिया। पीठ ने कहा लोगों को कुछ राहत देने की कोशिश करें। एक ही दिन, एक ही सेक्टर के लिए उड़ानें एक एयरलाइन इकॉनमी क्लास के लिए 8,000 रुपये लेती है और दूसरी एयरलाइन 18,000 रुपये लेती है।
टर्बाइन फ्यूल की कीमत में तेजी के बाद बदले टिकट के दाम
इस नई अर्जी में लक्ष्मीनारायणन ने उन खबरों का ज़िक्र किया जिनमें कहा गया था कि कई बड़े रूट पर किराया आम दिनों के मुकाबले दो से सात गुना तक पहुंच गया है। एयरलाइनों ने ऊंचे किराए का बचाव किया। एयरलाइंस ऐसे किराए की वजह एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमत बताती हैं। लेकिन एप्लीकेशन में बताया गया कि इतनी बढ़ोतरी मामूली बदलाव को सही ठहरा सकती है, कभी भी आम किराए से सात गुना किराया नहीं।
हवाई परिवहन ज़रूरी सेवा है
लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि उन्हें इस बात से कोई दिक्कत नहीं है कि एयरलाइंस फ्यूल की कीमत बढ़ने पर किराए में बदलाव कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि शिकायत सिर्फ डिमांड के आधार पर किराए तय करने से है, जिससे वे आम किराए से सात गुना तक बढ़ जाते हैं। उन्होंने कहा, ऐसी कीमतें शोषण करने वाली हैं और ज़रूरी सेवाओं के नियमों के खिलाफ हैं। किसी दूसरी ज़रूरी सर्विस की कीमत इस तरह से तय नहीं की जाती है।
रेलवे का फ्लेक्सी-फेयर बेस फेयर का डेढ़ गुना है, ज़रूरी दवाओं की कीमतें ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के तहत तय हैं, बिजली के टैरिफ रेगुलेटरी कमीशन तय करते हैं। उन्होंने कहा, हवाई यात्रा एकमात्र अपवाद नहीं हो सकती। आवेदक की माने तो एयर ट्रांसपोर्ट, एसेंशियल सर्विसेज़ मेंटेनेंस एक्ट, 1981 के तहत एक ज़रूरी सर्विस है', एक सर्विस जिसे राज्य अपनी कंटिन्यूटी बनाए रखने के लिए ज़रूरी मानता है। उसकी कीमत को लेकर पूरी तरह से अनरेगुलेटेड नहीं छोड़ा जा सकता, जिससे उस जनता को नुकसान हो जिसकी वह सेवा करता है।
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