राज्य
बिहार विधानसभा में पहचान की सियासत तेज, ‘भूमिहार’ शब्द पर बीजेपी-जेडीयू के बीच तकरार
सदन में भूमिहार और भूमिहार ब्राह्मण नाम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस विवाद के बीच बीजेपी व जेडीयू नेता आमने-सामने आ गए हैं।
बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान जाति के नाम को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। मामला भूमिहार जाति के आधिकारिक नाम से जुड़ा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी दस्तावेजों और जाति प्रमाण पत्रों में केवल ‘भूमिहार’ नाम का ही इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि ‘भूमिहार ब्राह्मण’ लिखने का कोई प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया है।
जातीय पहचान के मुद्दे पर सियासी घमासान
सरकार के इस रुख के बाद बीजेपी के भूमिहार समुदाय से आने वाले विधायक जीवेश मिश्रा और विशाल प्रशांत ने आपत्ति जताई है। दोनों नेताओं ने अपनी ही सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। विरोध के दौरान विधायक विशाल प्रशांत ने यहां तक मांग कर दी कि अगर भूमिहार को ‘भूमिहार ब्राह्मण’ नहीं माना जाता है तो उसे अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल किया जाए।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
दरअसल, बीजेपी विधायक जीवेश मिश्रा ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने कहा कि पुराने सरकारी रिकॉर्ड, गजट और कई ऐतिहासिक दस्तावेजों में भूमिहार जाति का उल्लेख ‘भूमिहार ब्राह्मण’ के रूप में मिलता है। लेकिन वर्तमान समय में बिहार सरकार की जाति सूची और प्रमाण पत्रों में केवल ‘भूमिहार’ लिखा जा रहा है।
जीवेश मिश्रा ने पुराने रिकॉर्ड का दिया हवाला
उन्होंने तर्क दिया कि इससे पुराने दस्तावेजों और मौजूदा सरकारी रिकॉर्ड के बीच अंतर पैदा हो रहा है। मिश्रा के अनुसार, सामाजिक संगठनों ने इस विषय को लेकर सरकार को पहले भी आवेदन दिए थे और 1931 की जनगणना सहित कई राजस्व दस्तावेजों का हवाला दिया था, जिनमें ‘भूमिहार ब्राह्मण’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था।
ये भी पढ़ें- ईरान तनाव के बीच ट्रंप की रूस-चीन को चेतावनी, कहा- दखल दिया तो...
डिप्टी सीएम ने सरकार का रुख किया स्पष्ट
इस मामले पर बिहार के उपमुख्यमंत्री और सामान्य प्रशासन विभाग के मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सरकार की स्थिति साफ कर दी। उन्होंने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में भूमिहार जाति को अलग जाति के रूप में दर्ज किया गया है और इसे ‘भूमिहार ब्राह्मण’ करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है, उन्होंने बताया कि उच्च जाति आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार सवर्ण वर्ग में ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार और कायस्थ को अलग-अलग जातियों के रूप में माना गया है। इसी आधार पर सरकार भूमिहार नाम में बदलाव के पक्ष में नहीं है।
आयोग की रिपोर्ट का दिया हवाला
डिप्टी सीएम ने सदन में बताया कि सामाजिक संगठनों से मिले आवेदनों के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने उच्च जाति आयोग से इस विषय पर राय मांगी थी। आयोग ने जनवरी 2025 में हुई बैठक के बाद स्पष्ट किया कि भूमिहार जाति का नाम बदलकर ‘भूमिहार ब्राह्मण’ करने का कोई प्रस्ताव नहीं है और आयोग ने भी ऐसी कोई सिफारिश नहीं की है।
विधानसभा में बढ़ा विवाद
सरकार के जवाब के बाद सदन में माहौल गरमा गया। बीजेपी विधायक विशाल प्रशांत ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर सरकार भूमिहार को ‘भूमिहार ब्राह्मण’ के रूप में मान्यता नहीं देना चाहती है, तो फिर इसे अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए।
भूमिहार नाम विवाद ने पकड़ा राजनीतिक रंग
इस बयान के बाद मामला और राजनीतिक हो गया है। अब यह विवाद सिर्फ जाति के नाम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक पहचान और सरकारी रिकॉर्ड में जातियों के वर्गीकरण को लेकर बहस का विषय बन गया है।
आपके दिए हुए प्रोफाइल को **राजीव सिंह** और **TNP News** के अनुसार ढालकर, NBT/Times of India से जुड़े संदर्भ हटाकर इस तरह किया जा सकता है: ## राजीव सिंह, TNP News में एडिटर और एक्सप्लेनर एक्सपर्ट हैं। राजीव सिंह TNP News में एक्सप्लेनर, स्पेशल स्टोरीज और रिसर्च आधारित खबरों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके एक्सप्लेनर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, बिजनेस, राजनीति, सामाजिक मुद्दों और एंटरटेनमेंट समेत विभिन्न कैटेगरी की खबरों से जुड़े होते हैं। किसी भी विषय पर स्टोरी तैयार करते समय शरद दीक्षित रिसर्च, डीप डाइव, फैक्ट चेक, वैल्यू एड और विशेषज्ञों की राय को विशेष महत्व देते हैं। TNP News के लिए वे महत्वपूर्ण और चर्चित मुद्दों पर विश्लेषणात्मक एवं रियल टाइम स्टोरीज तैयार करते हैं। उनका फोकस किसी भी खबर को केवल प्रस्तुत करने के बजाय उसके पीछे की पूरी कहानी, तथ्यों और उसके संभावित प्रभाव को पाठकों तक सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचाने पर रहता है। राजीव सिंह को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, राजनीति, बिजनेस, सामाजिक मुद्दों और मनोरंजन की खबरों पर लगातार नजर रखने का अनुभव है। किसी भी खबर पर उनकी पहली प्राथमिकता तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी होती है। इसके बाद वे यह समझने पर जोर देते हैं कि उस खबर का समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। ### पत्रकारिता का अनुभव राजीव सिंह ने पत्रकारिता के क्षेत्र में डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग, इंटरव्यू, रिसर्च, डिजिटल कंटेंट और स्पेशल स्टोरीज जैसी विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। अपने पत्रकारिता करियर के दौरान उन्होंने समाचारों के पारंपरिक माध्यमों के साथ-साथ डिजिटल पत्रकारिता की बदलती जरूरतों और नई तकनीकों को भी करीब से समझा है। उन्होंने राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर के महत्वपूर्ण मुद्दों को कवर करने के साथ-साथ राजनीतिक घटनाक्रम, चुनाव, सामाजिक विषयों, प्रशासनिक मुद्दों और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण किया है। TNP News में राजीव सिंह का प्रमुख फोकस रिसर्च आधारित पत्रकारिता, एक्सप्लेनर स्टोरी, डीप डाइव, स्पेशल स्टोरी और तथ्यपरक विश्लेषण पर है। उनका प्रयास रहता है कि जटिल और महत्वपूर्ण विषयों को आसान भाषा में इस तरह प्रस्तुत किया जाए कि पाठक खबर के साथ-साथ उसके कारण, प्रभाव और पूरे संदर्भ को भी समझ सके। ### पत्रकारिता का दृष्टिकोण राजीव सिंह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय घटनाओं, राजनीति, बिजनेस, सामाजिक मुद्दों और डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड पर उनकी लगातार नजर रहती है। वे खबर के तत्काल प्रभाव के साथ-साथ उसके दीर्घकालिक प्रभाव को भी समझने और पाठकों के सामने रखने पर जोर देते हैं। उनकी पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि पाठकों को **खबर के पीछे की कहानी, तथ्य और उसका असर** समझाना है। ### TNP News में भूमिका TNP News में राजीव सिंह एक्सप्लेनर, स्पेशल स्टोरीज, डीप डाइव और रिसर्च आधारित कंटेंट के साथ काम कर रहे हैं। वे महत्वपूर्ण घटनाओं और ट्रेंडिंग मुद्दों पर रियल टाइम एक्सप्लेनर और विश्लेषणात्मक स्टोरी तैयार करने के साथ डिजिटल ऑडियंस की जरूरतों के अनुसार कंटेंट को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी बनाने पर ध्यान देते हैं। TNP News के माध्यम से उनका प्रयास ऐसी पत्रकारिता को आगे बढ़ाना है जिसमें **तथ्य, रिसर्च, निष्पक्ष विश्लेषण और जनसरोकार** को प्राथमिकता मिले।