गणेश चतुर्थी पर पूज्य देव की प्रतिमा स्थापित कर सोमवार को गणेश महोत्सव शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने घरों में पूजा-अर्चना के साथ भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित करना शुरू कर दी है। दूसरी ओर, विभिन्न क्षेत्रों में आयोजन समितियों ने ढोल-नगाड़ों और बैंड बाजे के साथ गणपति की शोभायात्रा निकाली और उन्हें सजे हुए पंडालों में विराजमान कराया जा रहा है।

25 सितंबर होगी विसर्जन

गणेशोत्सव के दौरान 24 सितंबर तक प्रतिदिन भजन संध्या और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 25 सितंबर को नगर भ्रमण के बाद अनंत चतुर्दशी के अवसर पर गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। हालांकि, अलग-अलग समितियां अपनी परंपरा के अनुसार तीसरे, पांचवें, सातवें या दसवें दिन भी विसर्जन करती हैं।

पंडालों को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया

गणेश महोत्सव को लेकर रविवार को ही पटेलनगर, प्रेमनगर, मन्नूगंज, धामावाला, क्लेमेनटाउन समेत शहर के कई इलाकों में तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। आकर्षक रोशनी और सजावटी सामान से पंडालों को भव्य रूप दिया गया। कई स्थानों पर प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का काम भी देर तक चलता रहा।

शोभायात्रा के बाद की जा रही है स्थापना

शहर के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु गणपति की प्रतिमाएं लेकर पंडालों तक पहुंचे। सोमवार को क्षेत्र में शोभायात्रा और पूजा-अर्चना के बाद प्रतिमाओं की स्थापना की गई। बड़ी संख्या में लोगों ने अपने घरों में भी भगवान गणेश को विधि-विधान से विराजमान किया। इस दौरान भजन-कीर्तन और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

दोपहर से पहले स्थापना का शुभ समय

आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी सोमवार को पड़ रही है। गणपति स्थापना और पूजन के लिए मध्याह्न का समय विशेष रूप से शुभ माना जाता है। सोमवार को सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक पूजा और स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त है।

इतने घंटे तक है शुभ समय

पूजन के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा, लाल पुष्प, फल और मोदक अर्पित किए गए। उन्होंने बताया कि दस दिवसीय गणेशोत्सव का पारंपरिक समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। हालांकि, श्रद्धालु अपनी मान्यता और परंपरा के अनुसार इससे पहले भी प्रतिमा का विसर्जन कर सकते हैं। पूजा के लिए करीब दो घंटे 15 मिनट का शुभ समय निर्धारित था।

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बाजारों में प्रतिमाओं की खरीदारी को लेकर उत्साह

गणेश चतुर्थी से पहले बाजारों में भी खास रौनक देखने को मिली। घरों में प्रतिमा स्थापना और पूजा सामग्री की खरीदारी के लिए लोग बड़ी संख्या में बाजार पहुंचे। कुम्हार मंडी में छोटी प्रतिमाओं से लेकर करीब तीन फीट ऊंची मूर्तियों तक की बिक्री हुई।