Gyanvapi Case : वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी विवाद से जुड़े मामले में सुप्रीम 15 सितंबर 2026 को सुनवाई करेगा। दरअसल ज्ञानवापी परिसर के सीलबंद वजूखाना क्षेत्र और वहां मिले स्ट्रक्चर (शिवलिंग/फव्वारा) और पूजा से संबंधित यह पूरा मामला है। अभी तक मामले में लगातार सुनवाई व न्यायिक प्रक्रिया की जा रही है।

मामले में साल 2023 में राशी सिंह की तरह से अधिवक्ता मान बहादूर सिंह,अनुपम द्विवेदी और सौरभ तिवारी ने 62 पन्नों का एक प्रार्थनापत्र कोर्ट के समकक्ष रखा। इसमें लिखा कि शिवलिंग की आकृति को छोड़कर सील क्षेत्र वजूखाने का एएसआई सर्वे करवाया जाए। इसके बाद से ही इसमें मौजूद परिसर को सीलबंद कर दिया गया था। यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा सुप्रीम कोर्ट में एक आदेश का हवाला दिया गया था।

19 मई 2025 से पहले हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि मुसलमानों को मस्जिद में वजू करने और नामज पढ़ने से नहीं रोका जा सकता है। जहां शिवलिंग पाया गया था उस क्षेत्र को सुरक्षित रखने की बात भी कोर्ट ने कही। लेकिन इसके साथ ही व्यवस्था अगली तारीक तक के लिए की गई थी।

कोर्ट में अधिवक्ता ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की तरफ से 12 सितंबर 2024 के आदेश का उल्लेख किया। जिसमें कहा गया कि कोई और कार्यवाही नहीं की जा सकती है। आवेदिका अनुष्का तिवारी की तरफ से वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे। जिसमें वादमित्र ने षड्यंत्र के तहत कोर्ट द्वार अपनी नियुक्ति कराई है।

दरअसल यह विवाद उनके आराध्य से जुड़ा है। उनके आराध्य को कानूनी तौर पर नाबालिग माना जाता है। मामला हिंदू जनमानस से जुड़ा है। ऐसे में किसी व्यक्ति विशेष से इसे निजी वाद मानना गलत है। वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने भी कोर्ट में तर्क देते हुए कहा कि केस इस माइन..। इसे लेकर अनुष्का तिवारी ने आपत्ति दर्ज कराई है। ऐसे में अब देखना यह होगा कि मंदिर में नमाज पढ़ी जाएगी, या फिर शिवलिंग पर जल चढ़ेगा?


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