छत्तीसगढ़ का बस्तर कभी नक्सल गतिविधियों के लिए जाना जाता था। जंगलों और दुर्गम इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए पिछले दो दशकों में यहां बड़ी संख्या में सुरक्षा कैंप और फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) बनाए गए। अब बदलते सुरक्षा हालात के बीच इन्हीं कैंपों को धीरे-धीरे विकास और जनसेवा के केंद्रों में बदला जा रहा है। इस पहल के तहत सुरक्षा कैंपों को ‘जन सुविधा केंद्र’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां लोगों को एक ही जगह पर कई सरकारी और जरूरी सेवाएं मिल सकेंगी।

क्या है ‘जन सुविधा केंद्र’ योजना?

केंद्रीय गृह मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के सहयोग से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य दूरदराज के आदिवासी इलाकों में प्रशासन और जरूरी सुविधाओं की पहुंच आसान बनाना है। ‘बस्तर 2.0’ रोडमैप के तहत कुल 200 सुरक्षा कैंपों को जन सुविधा केंद्रों में बदलने का लक्ष्य रखा गया है।

पहले चरण में 70 सुरक्षा कैंपों को जन सुविधा केंद्र में बदला जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, पहले चरण का काम अब अंतिम दौर में है और बाकी केंद्रों को भी इस साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है।

कहां से शुरू हुआ मॉडल?

इस मॉडल की शुरुआत 18 मई 2026 को बस्तर के नेतानार गांव से हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यहां ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केंद्र’ मॉडल का उद्घाटन किया था। नेतानार जगदलपुर से करीब 27-30 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां CRPF की 80वीं बटालियन के ‘ब्रावो’ कंपनी कैंपस में इस मॉडल की शुरुआत की गई।

यह पहल केंद्र सरकार की ओर से 31 मार्च 2026 को देश को नक्सल-मुक्त बनाने की घोषणा के बाद सुरक्षा से विकास की ओर बढ़ते फोकस के रूप में देखी जा रही है।

इन केंद्रों पर कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी?

जन सुविधा केंद्रों को सिर्फ सरकारी दफ्तर के तौर पर नहीं, बल्कि एक ही जगह पर कई सेवाएं उपलब्ध कराने वाले केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

यहां कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के जरिए लोगों को कई सुविधाएं मिल सकेंगी, जैसे—

  • आधार कार्ड अपडेट और अन्य आधार सेवाएं
  • बैंकिंग सुविधाएं
  • आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन
  • राशन कार्ड से जुड़ी सेवाएं
  • आयुष्मान भारत कार्ड
  • ई-श्रम पंजीकरण
  • बिजली बिल जमा करने की सुविधा
  • ऑनलाइन सरकारी सेवाओं के लिए आवेदन
  • रेलवे और बस टिकट बुकिंग
  • प्रिंटिंग और स्कैनिंग जैसी डिजिटल सेवाएं

इसका सबसे बड़ा फायदा उन ग्रामीणों को होने की उम्मीद है, जिन्हें अभी छोटी-छोटी सरकारी प्रक्रियाओं के लिए भी ब्लॉक या जिला मुख्यालय तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

स्वास्थ्य सेवाएं भी होंगी उपलब्ध

इन केंद्रों का दायरा केवल प्रशासनिक सेवाओं तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार, यहां प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं, टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सहायता, पोषण कार्यक्रम और मलेरिया नियंत्रण जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

बस्तर के जिन गांवों में अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र काफी दूर हैं, वहां ऐसी सुविधाएं खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकती हैं। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम हो सकती है।

युवाओं और किसानों के लिए भी सुविधाएं

जन सुविधा केंद्रों को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका से जोड़ने की भी योजना है। इनमें स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग, युवाओं के लिए रोजगार मार्गदर्शन, कृषि सलाह, पीएम-किसान से जुड़ी सहायता और वन उपज एवं वन अधिकारों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

इसके अलावा कुछ केंद्रों में उचित मूल्य की दुकान, पेयजल, इंटरनेट कनेक्टिविटी, सामुदायिक बैठक हॉल, प्राथमिक स्कूल और आश्रम छात्रावास जैसी सुविधाएं भी शामिल की जा रही हैं।

सुरक्षा कैंपों को क्यों बदला जा रहा है?

बस्तर और अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए लंबे समय तक FOB बनाए गए। इनका उद्देश्य सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ाना, सड़कों और महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सुरक्षित करना तथा प्रशासन की पहुंच मजबूत करना था।

अब सरकार के अनुसार, कई क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है। ऐसे में जिन कैंपों की परिचालन जरूरत कम हो गई है, उन्हें चरणबद्ध तरीके से जन सुविधा केंद्रों में बदलने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

एक वरिष्ठ CRPF अधिकारी के मुताबिक, 31 मार्च 2026 को नक्सल-मुक्त भारत की घोषणा के बाद नए FOB खोलने की प्रक्रिया रोक दी गई है और कई मौजूदा FOB को जन सुविधा केंद्रों में बदला जा रहा है।

कब तक पूरा होगा पहला चरण?

परियोजना से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, पहले चरण में 70 कैंपों का रूपांतरण अंतिम चरण में है। इसे इस साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। अधिकारी ने यह भी बताया कि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो पहला चरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नवंबर के पहले सप्ताह में संभावित छत्तीसगढ़ दौरे से पहले पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। शुरुआती लक्ष्य करीब डेढ़ साल का था, लेकिन काम को उससे पहले पूरा करने की कोशिश की जा रही है।

सुरक्षा से विकास की ओर बदलाव

जन सुविधा केंद्रों की पूरी अवधारणा का आधार यही है कि जिन स्थानों पर कभी सुरक्षा कारणों से कैंप बनाए गए थे, वहां अब उन्हीं परिसरों का इस्तेमाल सरकारी सेवाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं पहुंचाने के लिए किया जाए।

सरकार का मानना है कि इससे दूरदराज के गांवों में सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ेगी, बिचौलियों पर निर्भरता कम हो सकती है और लोगों को अपने ही क्षेत्र में जरूरी सेवाएं मिल सकेंगी।

स्थानीय युवाओं और स्वयं सहायता समूहों को इन केंद्रों के संचालन और प्रबंधन से जोड़ने की भी योजना है। इस तरह ये केंद्र सिर्फ सरकारी सेवाओं के वितरण स्थल न रहकर स्थानीय विकास और आजीविका के नए केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की दिशा में काम कर रहे हैं, यानी बस्तर में सुरक्षा कैंपों का यह बदलाव केवल इमारतों के इस्तेमाल में परिवर्तन नहीं है, बल्कि सरकार के अनुसार सुरक्षा ढांचे को नागरिक सुविधाओं और विकास से जोड़ने की एक नई कोशिश है।

 

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