जम्मू और कश्मीर (डोडा): जम्मू-कश्मीर के डोडा में अपीलीय न्यायाधिकरण ने एक बुजुर्ग व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करते हुए उसके बेटे और बहू को उनकी संपत्ति से बेदखल करने का आदेश दिया है। मामला बुजुर्ग व्यक्ति की स्वयं अर्जित संपत्ति से जुड़ा है। इस फैसले का उद्देश्य बुजुर्ग को उसकी संपत्ति पर अधिकार और सम्मानपूर्वक जीवन जीने की सुरक्षा प्रदान करना है।

कोर्ट ने संपत्ति से बेटे और बहू को बेदखल करने का दिया निर्देश

वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण आदेश में डोडा के अपीलीय न्यायाधिकरण ने 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007' के तहत एक बुजुर्ग नागरिक की स्वयं अर्जित संपत्ति से उनके बेटे और बहू को बेदखल करने का निर्देश दिया है। इस मामले में ट्रिब्यूनल ने तहसीलदार डोडा को कानून के अनुसार आदेश लागू कराने और जरूरत पड़ने पर पुलिस की सहायता लेने के निर्देश भी दिए हैं। इस संदर्भ में आदेश की प्रति मिलने के 30 दिनों के भीतर इसे लागू करने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है।

न्यायाधिकरण ने 'मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल' के फैसले को बदला

इस मामले में डोडा के जिला मजिस्ट्रेट कृष्ण लाल (JKAS) की अध्यक्षता वाले इस अपीलीय न्यायाधिकरण में डोडा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मो. असलम, अतिरिक्त उपायुक्त/अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट अनिल कुमार ठाकुर (JKAS) और जिला समाज कल्याण अधिकारी जुबैर अहमद सदस्य के रूप में शामिल थे। न्यायाधिकरण ने 'मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल' (भरण-पोषण न्यायाधिकरण), डोडा के एक पूर्व फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया गया।

अपीलीय न्यायाधिकरण ने पिछले आदेश में किया संशोधन 

यह अपील तब दायर की गई थी जब मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल ने शुरू में बुजुर्ग नागरिक को बेदखली के जरिए राहत देने से इनकार कर दिया था। लेकिन, इस मामले के रिकॉर्ड और लागू कानूनी प्रावधानों की गहन समीक्षा के बाद, अपीलीय न्यायाधिकरण ने पिछले आदेश में संशोधन किया और प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे बुजुर्ग की स्वयं अर्जित संपत्ति के उन हिस्सों को खाली कर दें जिन पर उन्होंने कब्जा कर रखा है। इसके साथ ही संपत्ति का पूरा अधिकार वापस अपीलकर्ता को सौंप दें।