Delhi news: दिल्ली की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर एक ट्रेन के अंदर सीट के ऊपर राजनीतिक आलोचना वाले 2 पोस्टर चिपके मिले थे। मामले में Delhi Police की IGI एयरपोर्ट मेट्रो पुलिस ने शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशन पर पोस्टर चिपकाने और काली स्याही से लिखने के मामले में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह घटना 24 अक्टूबर 2026 की है। शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशन के इमरजेंसी गेट नंबर 5 के पास दीवार पर पोस्टर चिपकाए गए थे और गेट नंबर 7 के पास शाफ्ट की दीवार पर काली स्याही से कुछ संदेश लिखे पाए गए थे।
स्पेशल सेल जांच में जुटी
मेट्रो स्टेशन के कंट्रोलर की शिकायत और सीआईएसएफ (CISF) द्वारा दी गई जानकारी के बाद, पुलिस ने 'दिल्ली प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट' (संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम) और 'मेट्रो रेलवे एक्ट' की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मेट्रो स्टेशन के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाल रही हैं ताकि ऐसा करने वाले संदिग्धों की पहचान की जा सके। इससे कुछ दिन पहले ही दिल्ली मेट्रो की इसी एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के अंदर सीटों पर सरकार की आलोचना करने वाले और क्यूआर (QR) कोड वाले पोस्टर चिपके मिले थे, जिसके बाद पुलिस की स्पेशल सेल भी इस तरह के मामलों की जांच में जुटी हुई है।
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गेट नंबर 7 के पास एक शाफ्ट की दीवार पर लिखा था
24 अक्टूबर को सामने आए इस मामले के बाद आईजीआई एयरपोर्ट मेट्रो पुलिस ने दिल्ली संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 2007 की धारा 3 और मेट्रो रेलवे अधिनियम 2002 की धारा 62 (2) के तहत मामला दर्ज किया। 24 अक्टूबर को शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशन के इमरजेंसी गेट नंबर 5 के पास कथित तौर पर पोस्टर चिपकाए गए और गेट नंबर 7 के पास एक शाफ्ट की दीवार पर काली स्याही से कुछ लिखा गया। दिल्ली पुलिस के मुताबिक FIR दिल्ली प्रिवेंशन ऑफ़ डिफेसमेंट ऑफ़ पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट, 2007 और मेट्रो रेलवे (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) एक्ट, 2002 के तहत दर्ज की गई है। पुलिस ने पोस्टर ज़ब्त कर लिए हैं, जबकि स्पेशल सेल भी जांच में लगी हुई है।
पूर्व DCP एलएन राव का बयान
दिल्ली पुलिस के पूर्व DCP एलएन राव ने मामले में कहा कि पोस्टर लगाने का काम एक बड़ी साज़िश का हिस्सा लगता है और जांच से पता चलेगा कि इसके पीछे कौन था। IPC की धारा 120B (जैसा कि पहले जाना जाता था) के तहत केस दर्ज किया गया है - और जांच से पता चलेगा कि ये लोग कौन थे, उन्हें पोस्टर लगाने के लिए किसने कहा, और उनका मकसद क्या था। जांच पूरी होने के बाद ही आगे कुछ कहा जा सकता है। जांच एजेंसी सारे सबूत इकट्ठा करके असली शख्स को पकड़ने में लगी है।
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