New Delhi: जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने कहा कि जो लोग मुसलमानों को उनके ही देश में पराया और दोयम दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वे वास्तव में देश के दुश्मन हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमान भारत में किसी की दया पर नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों की कुर्बानियों और देश की आजादी में दिए गए योगदान के बल पर रहते हैं।
संवैधानिक मूल्यों पर जताई चिंता
हरियाणा के नूंह, मेवात स्थित डीएलडी स्प्रिंगफील्ड, पीपाका में 30 और 31 अक्टूबर को आयोजित जमीअत की दो दिवसीय कार्यकारिणी बैठक को संबोधित करते हुए मौलाना मदनी ने कहा कि देश लोकतांत्रिक और संवैधानिक संकट से गुजर रहा है। धार्मिक नफरत, भेदभाव और इस्लामोफोबिया का माहौल अल्पसंख्यकों के साथ-साथ दलितों और कमजोर वर्गों के अधिकारों को भी प्रभावित कर रहा है।
उन्होंने पिछले एक वर्ष में नफरत भरे भाषणों की 1,600 से अधिक प्रमाणित घटनाओं का उल्लेख करते हुए दावा किया कि 87 प्रतिशत मामलों में एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई। उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई को कानून के शासन और न्यायपालिका की गरिमा के विरुद्ध बताया।
कार्यकारिणी में पारित हुए महत्वपूर्ण प्रस्ताव
बैठक में मॉब लिंचिंग, सामाजिक बहिष्कार और नफरत आधारित अपराधों पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश लागू करने तथा विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने की मांग की गई।
इसके अलावा वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 पर पुनर्विचार, वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा के लिए स्वतंत्र संस्था के गठन और फिलिस्तीन में युद्धविराम तथा स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना का समर्थन किया गया।
युवाओं से संघर्ष और संगठन मजबूत करने की अपील
मौलाना मदनी ने कार्यकर्ताओं से निराशा और शिकायतों को छोड़कर साहस के साथ अन्याय का मुकाबला करने की अपील की। उन्होंने कहा कि धार्मिक पहचान की रक्षा केवल नारों से नहीं, बल्कि अपने जीवन में धार्मिक मूल्यों को अपनाने से संभव है।
बैठक में मौलाना अबुल कासिम नोमानी, मौलाना सलमान बिजनौरी और अन्य प्रमुख उलेमा ने भी विचार रखे। इस अवसर पर कई पुस्तकों का विमोचन हुआ तथा राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और संगठनात्मक मजबूती के लिए नई कार्ययोजनाओं पर जोर दिया गया।
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Written By: एम अतहर उद्दीन मुन्ने भारती