Jharkhand Students Protest: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में sअनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रांची के जेपी स्टेडियम में चल रहा धरना बुधवार को 13वें दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं राज्य के विभिन्न जिलों से रांची पहुंचकर प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारी हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। आंदोलन को और धार देने के लिए पांच छात्र पिछले तीन दिनों से आमरण अनशन पर भी बैठे हैं।
सरकार बातचीत के लिए तैयार,कमेटी बनने के संकेत
लगातार सरकार से संवाद की मांग कर रहे छात्रों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। सूत्रों के अनुसार,राज्य सरकार अब प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत के लिए तैयार हो गई है। बताया जा रहा है कि सरकार जल्द ही एक प्रतिनिधि समिति या कमेटी का गठन कर सकती है,जो छात्रों से बातचीत कर उनकी मांगों पर चर्चा करेगी। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?
प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांग 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने की है। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर धांधली हुई है। छात्र इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कराने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई जा रही है। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो 10 अगस्त को विधानसभा कूच किया जाएगा।
CID जांच में अब तक 14 गिरफ्तारियां
इस बीच झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अपराध अनुसंधान विभाग (CID) कर रहा है। जांच के दौरान मंगलवार को तीन और आरोपियों उमेश कुमार, बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार को गिरफ्तार किया गया। इसके साथ ही इस मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है।
CID के अनुसार, इन सभी के खिलाफ 22 जुलाई 2026 को दर्ज कांड संख्या 16/26 के तहत कार्रवाई की गई है। जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इन लोगों पर परीक्षा संचालन को प्रभावित करने का आरोप है और आगे भी जांच जारी रहेगी।
सरकार पर संवाद न करने का आरोप
धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री आवास प्रदर्शन स्थल से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर है,लेकिन अब तक मुख्यमंत्री या सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने नहीं आया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रही है। उनका यह भी कहना है कि केवल सीआईडी जांच से निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं होगी और यह जांच 'लीपापोती' साबित हो सकती है। इसी कारण वे सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।
चयन प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
छात्रों ने परीक्षा परिणामों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि कुछ अभ्यर्थियों ने 300 में से 299 अंक हासिल करने के बावजूद चयन नहीं पाया, जबकि कुछ उम्मीदवारों ने कथित तौर पर 100 में से केवल 48 प्रश्न हल किए और उनका चयन हो गया। प्रदर्शनकारी इन दावों को परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का प्रमाण बताते हुए पूरी चयन प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।
परीक्षा संचालन एजेंसी भी जांच के दायरे में
विवादों के केंद्र में परीक्षा संचालन एजेंसी TDPL (TSR Data Processing Private Limited) भी है। आरोप है कि ओएमआर शीट और परीक्षा संचालन में कथित अनियमितताओं के मामले में एजेंसी जांच के घेरे में है। छात्रों का दावा है कि एजेंसी पहले से ब्लैकलिस्टेड होने के बावजूद विभिन्न राज्यों में परीक्षाएं आयोजित करती रही। इन आरोपों के बाद एजेंसी की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
9 परीक्षाएं पहले ही हो चुकी हैं स्थगित
भर्ती परीक्षाओं को लेकर बढ़ते विवाद और CID जांच के बीच झारखंड लोक सेवा आयोग पहले ही 25 से 27 जुलाई 2026 के बीच प्रस्तावित 14वीं संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा समेत कुल नौ परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित कर चुका है। अब छात्रों की नजर सरकार और जांच एजेंसियों की आगामी कार्रवाई पर टिकी है। यदि सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच जल्द सकारात्मक बातचीत नहीं होती, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
Written By: Geeta Sharma