मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। पार्टी ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह युवा नेता आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। इस फैसले के बाद बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे दतिया में राजनीतिक माहौल गर्मा गया।

समर्थकों ने कई घंटों तक किया चक्काजाम

विरोध के दौरान नाराज समर्थकों ने दतिया नेशनल हाईवे पर कई घंटों तक चक्काजाम किया। पुलिस और प्रशासन ने समर्थकों को हटाने की कार्रवाई की, जिसके बाद जाम समाप्त कराया गया। समर्थकों का आरोप है कि उन्हें हटाने के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और कई कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की। हालांकि प्रशासन ने लाठीचार्ज किए जाने से इनकार किया है। प्रदर्शन कर रहे समर्थकों का कहना है कि पार्टी ने लंबे समय से संगठन के लिए काम करने वाले नेताओं और समर्थकों की अनदेखी की है। नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने आशुतोष तिवारी की उम्मीदवारी का विरोध करते हुए स्पष्ट किया कि वे इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और टिकट पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।

पुलिस कार्रवाई में 50 से अधिक कार्यकर्ता घायल

 समर्थकों के घायल होने के भी दावे सामने आए हैं। समर्थकों का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई में 50 से अधिक कार्यकर्ता घायल हुए, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर अभद्र व्यवहार और अनावश्यक सख्ती बरतने का आरोप लगाया। वहीं कुछ कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के खिलाफ भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वे इस फैसले से स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

पत्थरबाजी के बाद छोड़े गए आंसू गैस के गोले- प्रशासन

दूसरी ओर, जिला प्रशासन का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबे समय तक जाम लगे रहने से आम लोगों को भारी परेशानी हुई। जिलाधिकारी स्वप्निल वानखेड़े के अनुसार करीब 20 किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई थी और महिलाएं, बच्चे तथा अन्य यात्री घंटों फंसे रहे। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने देर रात तक प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन पत्थरबाजी होने के बाद स्थिति नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। प्रशासन के मुताबिक इस घटना में जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक सहित कई अधिकारी और आठ पुलिसकर्मी भी घायल हुए। डीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि लाठीचार्ज नहीं किया गया और प्रशासन का उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।

जिलाध्यक्ष समेत कई पदाधिकारियों का सामूहिक इस्तीफा

इस पूरे घटनाक्रम के बीच बीजेपी संगठन को भी बड़ा झटका लगा है। दतिया जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा ने अपने कई पदाधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ सामूहिक इस्तीफे की घोषणा कर दी। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को भेजे पत्र में आरोप लगाया कि उम्मीदवार चयन का निर्णय कार्यकर्ताओं की राय के बिना लिया गया और इससे संगठन की उपेक्षा हुई है।

बीजेपी के सामने संगठन बचाने की चुनौती

रघुवीर सिंह ने चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर नरोत्तम मिश्रा को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया तो वे पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा देंगे और फैसले का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रखेंगे। उनके इस कदम के बाद दतिया में बीजेपी की अंदरूनी राजनीति और अधिक चर्चा का विषय बन गई है। दतिया में उभरे इस विवाद ने बीजेपी के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर पार्टी को उपचुनाव में विपक्ष का मुकाबला करना है, वहीं दूसरी ओर संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष और नाराज कार्यकर्ताओं को भी साथ लेकर चलना होगा। अब सभी की नजर पार्टी नेतृत्व पर है कि वह मौजूदा उम्मीदवार के साथ चुनाव मैदान में उतरता है या कार्यकर्ताओं की मांग को देखते हुए अपने फैसले पर पुनर्विचार करता है।

 

Written By Toshi Shah