उत्तर प्रदेश में करीब साढ़े पांच महीने तक चले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बाद शुक्रवार को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा इसे औपचारिक रूप से सार्वजनिक करेंगे।
अंतिम सूची में 13.35 करोड़ मतदाता होंगे शामिल
इस बार की मतदाता सूची को खास माना जा रहा है, क्योंकि इसमें व्यापक सत्यापन, आपत्तियों के निस्तारण और नए पंजीकरण के बाद मतदाताओं का स्वरूप काफी बदला हुआ नजर आएगा। अनुमान है कि अंतिम सूची में लगभग 13.35 करोड़ मतदाता शामिल होंगे, जो वर्ष 2025 की सूची की तुलना में करीब दो करोड़ कम हो सकते हैं।
27 अक्टूबर से शुरू हुआ था एसआइआर अभियान
मतदाताओं की संख्या में इस कमी की मुख्य वजह मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और अप्रमाणित नामों को हटाया जाना है। एसआइआर अभियान 27 अक्टूबर से शुरू हुआ था और चरणबद्ध तरीके से संचालित किया गया। 6 जनवरी को जारी प्रारूप सूची में 15.44 करोड़ में से 2.89 करोड़ नाम हटाकर संख्या घटाकर 12.55 करोड़ कर दी गई थी।
प्रमाण न दे पाने के नाम नहीं होंगे शामिल
इसके बाद दावे और आपत्तियों पर सुनवाई की गई। पुनरीक्षण के दौरान वर्ष 2003 की सूची से जुड़े 1.04 करोड़ ऐसे मतदाताओं के रिकॉर्ड नहीं मिले, जबकि 2.22 करोड़ मामलों में तार्किक विसंगतियां पाई गईं। संबंधित लोगों को दस्तावेज प्रस्तुत करने का मौका दिया गया, लेकिन तय समय में प्रमाण न दे पाने वालों के नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं किए गए।
बड़ी संख्या में नए मतदाता होंगे शामिल
दूसरी ओर, नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया भी तेज रही। 27 अक्टूबर से 6 मार्च के बीच 86.69 लाख लोगों ने फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया, जबकि 3.18 लाख लोगों ने फॉर्म-7 के जरिए नाम हटाने की मांग की। इन सभी आवेदनों के निपटारे के बाद बड़ी संख्या में नए मतदाता भी सूची में शामिल होंगे।
प्रशासन की नजर सूची पर हैं टिकी
अंतिम मतदाता सूची जारी होने के साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को भी गति मिलेगी, क्योंकि यही सूची मतदान की आधारशिला होगी। राजनीतिक दलों और प्रशासन की नजर अब इस सूची पर टिकी है, क्योंकि इसमें हुए बदलाव चुनावी रणनीति और बूथ स्तर की तैयारियों को सीधे प्रभावित करेंगे।
Written By Toshi Shah