Iran-Israel War: पश्चिम एशिया में जारी ईरान संघर्ष को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बनी हुई है। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यह युद्ध अगले दो हफ्तों में समाप्त हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्ष के समाप्त होने के बाद भी इसके प्रभाव लंबे समय तक महसूस किए जाएंगे, खासकर ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर।

2 हफ्ते में खत्म होगा युध्द

सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है, जो दुनिया के लगभग 20-25% तेल परिवहन का प्रमुख मार्ग है। यदि यह जलडमरूमध्य पूरी तरह से नहीं खुलता, तो युद्ध समाप्त होने के बावजूद तेल और गैस की सप्लाई बाधित रह सकती है। वर्तमान में कई तेल टैंकर समुद्र में फंसे हुए हैं, जिनका असर आने वाले हफ्तों में बाजार पर साफ दिखेगा।

ऑयल प्लांट को बहाल करने में लगेंगे महीनों

विशेषज्ञों के अनुसार, हालात सामान्य होने में कम से कम 6 से 8 हफ्ते लग सकते हैं। इसका कारण यह है कि सप्लाई चेन को फिर से व्यवस्थित करना, जमा तेल को बाजार तक पहुंचाना और क्षतिग्रस्त इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत करना समय लेने वाला कार्य है। छोटे स्तर की मरम्मत जल्दी हो सकती है, लेकिन बड़े ऑयल प्लांट को पूरी तरह बहाल करने में महीनों या साल तक लग सकते हैं।

समुद्री मार्गों की सुरक्षा बड़ी चुनौती

युद्ध के बाद समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी एक बड़ी चुनौती होगी। समुद्र में बिछाई गई माइंस को हटाना जोखिम भरा और समयसाध्य कार्य है। इसके अलावा, क्षतिग्रस्त जहाजों का मलबा हटाना भी जरूरी होगा। शिपिंग लागत में भारी वृद्धि देखी गई है, जहां तेल टैंकरों का दैनिक किराया कई गुना बढ़ चुका है। ऐसे में शिपिंग दरों को सामान्य होने में 2 से 6 हफ्तों का समय लग सकता है।

ईंधन संकट और महंगाई तेजी से बढ़ी

भारत पर फिलहाल असर सीमित है, क्योंकि देश ने वैकल्पिक सप्लाई स्रोत और रणनीतिक भंडार तैयार कर रखे हैं। फिर भी प्रीमियम ईंधन और गैस की कीमतों में वृद्धि देखी जा रही है। वहीं, दक्षिण एशिया के छोटे देशों पर इसका असर अधिक गंभीर हो रहा है, जहां ईंधन संकट और महंगाई तेजी से बढ़ रही है।

 Writen By: Geeta Sharma