सावन का महीना शुरू होते ही शिव मंदिरों में भक्तों की आवाजाही बढ़ जाती है। सुबह होते ही मंदिरों में घंटियों की गूंज सुनाई देने लगती है और श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचने लगते हैं। कई भक्त मंदिर जाने के बजाय घर पर ही पूजा-अर्चना कर महादेव का आशीर्वाद लेते हैं। खासकर सावन के सोमवार को शिव भक्तों के लिए विशेष आस्था का दिन माना जाता है। आज सावन का दूसरा सोमवार है। पंचांग के अनुसार मध्य प्रदेश सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में इस वर्ष सावन की शुरुआत 30 जुलाई से हुई है। इस बार सावन में कुल चार सोमवार पड़ रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार का व्रत और भगवान शिव की पूजा करने से मन को शांति मिलती है। भक्त इस दिन अपनी श्रद्धा के अनुसार महादेव की आराधना करते हैं और सुख-समृद्धि व मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।

कैसे करें सावन के दूसरे सोमवार की पूजा?

सावन सोमवार की पूजा के लिए विशेष और महंगी सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। श्रद्धा और स्वच्छता के साथ की गई पूजा को ही महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा के लिए आप इस सरल विधि को अपना सकते हैं:

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • घर के पूजा स्थल को साफ करने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करें।
  • सुविधा हो तो नजदीकी शिव मंदिर में जाकर भी पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
  • सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल अर्पित करें।
  • इसके बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जा सकता है।
  • अभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, फूल और धतूरा अर्पित करें।
  • बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि पत्ते स्वच्छ और बिना टूटे हुए हों।
  • ‘ॐ नमः शिवाय’ का करें जाप

भगवान शिव की पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार शिव चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं। पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और परिवार के स्वास्थ्य, सुख-शांति तथा अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।

सावन सोमवार को क्यों माना जाता है खास?

हिंदू धार्मिक परंपराओं में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना गया है। इस पूरे महीने शिव आराधना का विशेष महत्व बताया जाता है। वहीं सोमवार का दिन स्वयं भगवान शिव की पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि सावन के सोमवार को मंदिरों में विशेष पूजा और अभिषेक किए जाते हैं। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी आस्था और क्षमता के अनुसार उपवास करते हैं। कुछ लोग फलाहार करते हैं, जबकि कुछ सात्विक भोजन के साथ व्रत रखते हैं। निर्जल व्रत रखने की भी परंपरा कुछ लोगों में है, लेकिन उपवास का तरीका अपनी सेहत, क्षमता और पारिवारिक परंपरा को ध्यान में रखकर तय करना बेहतर माना जाता है।

पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान

शिव पूजा में आडंबर के बजाय श्रद्धा को अधिक महत्व दिया जाता है। इसलिए पूजा के लिए बहुत अधिक या महंगी सामग्री जुटाना जरूरी नहीं है। शुद्ध जल, बेलपत्र और सच्चे मन से किया गया ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप भी श्रद्धा के साथ की गई पूजा का हिस्सा हो सकता है। पूजा के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और अपनी परंपरा के अनुसार सात्विकता बनाए रखें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूजा पूरे विश्वास और शांत मन से की जाए।

 

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 Written By Toshi Shah  

 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. TNP News इसकी पुष्टि नहीं करता है।)