हिंदू धर्म में सावन और भाद्रपद महीने में आने वाली तीज तिथियों का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज तीन प्रमुख पर्व हैं, जिन्हें सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से यह व्रत करती हैं। ये तीनों तीज माता पार्वती और भगवान शिव के अटूट प्रेम और मिलन का प्रतीक मानी जाती हैं।

हरियाली तीज (Hariyali Teej)
हरियाली तीज सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन माता पार्वती ने वर्षों तक कठोर तपस्या करने के बाद भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। सावन की हरियाली, प्रकृति की सुंदरता और नई ऊर्जा के कारण इस पर्व का नाम हरियाली तीज पड़ा।

मुख्य परंपराएं:
महिलाएं इस दिन हरे रंग के वस्त्र, चूड़ियां और मेहंदी लगाकर सोलह श्रृंगार करती हैं।
घरों और मंदिरों में झूले लगाए जाते हैं और महिलाएं लोकगीत गाती हैं।
यह व्रत अखंड सौभाग्य, दांपत्य प्रेम और परिवार में सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है।

कजरी तीज (Kajri Teej)
कजरी तीज भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को आती है। यह हरियाली तीज के करीब 15 दिन बाद मनाई जाती है। इसे सातूड़ी तीज और बूढ़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। कजरी तीज का संबंध बारिश के मौसम, काले बादलों और प्रकृति की सुंदरता से जुड़ा हुआ है। महिलाएं इस दिन पति की लंबी उम्र, सुहाग की रक्षा और संतान सुख की कामना करती हैं।

मुख्य परंपराएं:
महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं।
सत्तू से बने विशेष पकवान तैयार किए जाते हैं और भगवान को भोग लगाया जाता है।
नीमड़ी माता की पूजा का भी विशेष महत्व होता है।

हरतालिका तीज (Hartalika Teej)
हरतालिका तीज भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। तीनों तीजों में हरतालिका तीज को सबसे कठिन और महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती की सखियां उन्हें जंगल में ले गई थीं, जहां उन्होंने रेत से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी।

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मुख्य परंपराएं:
इस दिन महिलाएं निर्जला और निराहार व्रत रखती हैं।
रातभर जागरण कर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
मिट्टी या बालू से बनी प्रतिमाओं की विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है।
मान्यता है कि इस व्रत को अधूरा नहीं छोड़ा जाता।

तीनों तीजों में क्या है अंतर?
हरियाली तीज: सावन की हरियाली, उत्साह और प्रकृति के सौंदर्य का पर्व है।
कजरी तीज: सत्तू के भोग, नीमड़ी माता की पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा वाला पर्व है।
हरतालिका तीज: सबसे कठिन निर्जला व्रत है, जिसमें शिव-पार्वती की पूजा और रातभर जागरण किया जाता है।

तीज व्रत की पूजा विधि (Puja Vidhi)
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
घर की साफ-सफाई कर पूजा स्थल को सजाएं।
व्रत का संकल्प लेकर भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
चौकी पर गंगाजल मिले मिट्टी से भगवान शिव का शिवलिंग, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
भगवान शिव को वस्त्र और पूजा सामग्री चढ़ाएं।
तीज व्रत की कथा सुनें और विधिपूर्वक आरती करें।
रात के समय भजन-कीर्तन और जागरण करने की परंपरा है।
पूजा में बेलपत्र, आम के पत्ते, चंपा और केवड़ा आदि अर्पित करना शुभ माना जाता है।

तीज केवल एक व्रत नहीं बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक पर्व है। इन पर्वों के माध्यम से महिलाएं परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की कामना करती हैं।

Written by Rozi Sinha